अयोध्या: राम मंदिर निर्माण के लिए मिल रहे चंदे में कथित गबन और अनियमितताओं के आरोपों के बाद सूबे की राजनीति में उबाल आ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT (विशेष जांच दल) का गठन किया था। आज जांच का छठा दिन है और सूत्रों के अनुसार, SIT की टीम अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपने के लिए लखनऊ लौट सकती है।
🛡️ क्या है SIT जांच का दायरा?
14 जून को गठित तीन सदस्यीय SIT, जिसमें आईएएस विजय विश्वास पंत, आईपीएस किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं, मामले के हर पहलू को खंगाल रही है। टीम ने अब तक:
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राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों से विस्तृत पूछताछ की है।
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डोनेशन काउंटिंग से जुड़े कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं।
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संबंधित बैंकों से लेन-देन का रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच की है।
📢 CM योगी का कड़ा रुख: ’15 दिन का और करें इंतज़ार’
अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ होकर रहेगा। उन्होंने कहा, “हमने 500 साल इंतजार किया, अब 15 दिन और इंतजार कीजिए।” सीएम ने यह भी चेतावनी दी कि अयोध्या को बदनाम करने और राम जन्मभूमि मंदिर की छवि धूमिल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने सभी पक्षों से जांच पूरी होने तक बेबुनियाद टिप्पणियों से बचने की अपील की है।
⚔️ राजनीतिक घमासान: सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष
यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर तंज कसा और उनकी अयोध्या यात्राओं की भी जांच के लिए SIT गठित करने की मांग की है। इससे पूर्व, सपा नेता पवन पांडे ने 7.5 करोड़ रुपये के चंदे में गबन का आरोप लगाकर सरकार की चुप्पी पर सवाल खड़े किए थे और सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की थी।
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