अयोध्या: अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान और चढ़ावे में कथित गबन के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) आज (सोमवार, 22 जून) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप सकती है। पिछले 6 दिनों से अयोध्या में डेरा डाले SIT ने मंदिर प्रबंधन, दान पेटियों की गिनती, और जमीन खरीद से जुड़े हर पहलू की गहराई से पड़ताल की है।
🔍 जांच के दायरे में 150 संदिग्ध, 25 पर कार्रवाई तय
SIT की गहन जांच में अब तक 150 संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से 25 लोगों पर सीधे कार्रवाई होने की संभावना है। जांच टीम ने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय सहित कई बड़े अधिकारियों के बयान दर्ज किए हैं। इसके अलावा, दान राशि गिनने से जुड़े पांच व्यक्तियों के खुलासों के आधार पर अब तक 2 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है।
🏗️ 71 एकड़ जमीन खरीद और भारी अनियमितता
SIT ने 2021 से अब तक के जमीन खरीद के रिकॉर्ड को खंगाला है। आरोप है कि ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई 71 एकड़ जमीन के कुछ हिस्सों को बाजार मूल्य से 500% से 800% अधिक दरों पर खरीदा गया। SIT ने न केवल भुगतान की प्रक्रिया की पड़ताल की है, बल्कि ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन में मौजूद खामियों को भी चिन्हित किया है।
💡 रिपोर्ट में संरचनात्मक सुधार के सुझाव
सूत्रों के अनुसार, SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट के कामकाज को पारदर्शी बनाने के लिए कई बड़े सुधारों की सिफारिश की गई है:
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CEO की नियुक्ति: मंदिर के प्रबंधन के लिए एक पेशेवर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति।
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साप्ताहिक ऑडिट: दान राशि की गणना और प्रबंधन का अनिवार्य साप्ताहिक ऑडिट।
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सुरक्षा और डेटा: सीसीटीवी कैमरों के डेटा स्टोरेज की अवधि को 45 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करना।
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ट्रस्ट का पुनर्गठन: ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव और सभी सदस्यों की जवाबदेही तय करना।
⚠️ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन
रिपोर्ट में यह भी जोर दिया गया है कि ट्रस्ट संचालन के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया जाए। SIT का मानना है कि पेशेवर तरीके अपनाकर ही मंदिर की पवित्रता और दानदाताओं की आस्था को सुरक्षित रखा जा सकता है। मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद, आगे की विस्तृत जांच और कड़ी कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा।
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