रायपुर: शहर में शुक्रवार को अंतर्विभागीय समिति की बैठक हुई. जिसमें इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट शुल्क को लेकर गंभीर चिंता जताई गई. IMA के अनुसार वर्तमान शुल्क व्यवस्था कई स्वास्थ्य संस्थानों के लिए अनुचित है.
छोटे क्लिनिक पर शुल्क खत्म करने की मांग
IMA स्टेट प्रेसिडेंट डॉ. अनूप वर्मा ने कहा कि छोटे क्लिनिक, डेंटल क्लिनिक और फिजियोथेरेपी सेंटर बहुत कम बायोमेडिकल कचरा उत्पन्न करते हैं. इसके बावजूद उन पर शुल्क लगाया जाना गलत है. IMA ने इन पर लगने वाले शुल्क को तुरंत खत्म करने की मांग की.
बेड के आधार पर शुल्क पर सवाल
IMA ने यह भी कहा कि अस्पतालों से बिस्तरों (beds) की संख्या के आधार पर शुल्क लेना सही नहीं है. क्योंकि वास्तविकता में सिर्फ 30–40% बेड ही उपयोग में रहते हैं. ऐसे में पूरे बेड के हिसाब से शुल्क लेना अनुचित है.
कचरे के वजन के आधार पर शुल्क का सुझाव
IMA ने सुझाव दिया कि शुल्क को बेड संख्या के बजाय उत्पन्न बायोमेडिकल कचरे (किलोग्राम में) के आधार पर तय किया जाए. इससे व्यवस्था अधिक न्यायसंगत, पारदर्शी, व्यावहारिक हो सकेगी.
कचरा कम दिखाने की आशंका पर विवाद
बैठक में SMS के एक अधिकारी ने आशंका जताई कि कुछ संस्थान कचरे का वजन कम दिखा सकते हैं. इस पर IMA रायपुर के अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सोलंकी ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि डॉक्टरों पर इस तरह का अविश्वास गलत है. ऐसी बातें निराधार हैं.
SMS की मोनोपोली खत्म करने की मांग
IMA ने प्रशासन से यह भी मांग की कि: SMS की एकाधिकार (monopoly) खत्म की जाए. रायपुर संभाग में कम से कम 3 एजेंसियों को काम करने की अनुमति दी जाए. इससे सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी.
पारदर्शी सिस्टम का समर्थन, आर्थिक बोझ का विरोध
IMA ने स्पष्ट किया कि डॉक्टर हमेशा नियमों का पालन करते हैं और पारदर्शी सिस्टम का समर्थन करते हैं. लेकिन अनावश्यक आर्थिक बोझ स्वीकार नहीं किया जाएगा.
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
