लोकसभा में गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही विपक्ष की तरफ से गैस सिलेंडर को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया. सदन के स्थगन के बाद विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में जमकर नारेबाजी की. राहुल ने सदन शुरू होने के बाद देश के मौजूदा फ्यूल संकट पर सदन में बोलने की अनुमति मांगी थी. हालांकि उन्हें यह अनुमति नहीं दी गई. स्पीकर की ओर से कहा गया कि अब नियम बदल गए हैं.
राहुल गांधी ने लोकसभा में देश की ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन की संभावित कमी को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि वह संसद में एलपीजी गैस और तेल की स्थिति पर बयान देना चाहते थे, लेकिन उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई.
राहुल गांधी ने कहा कि आमतौर पर प्रक्रिया यह होती है कि आप बोलने की अनुमति मांग सकते हैं. इसलिए मैंने देश में LPG गैस और तेल की स्थिति के बारे में बयान देने की अनुमति मांगी. लेकिन अब एक नई प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसमें पहले मंत्री फैसला करेंगे, फिर मैं बोलूंगा, और फिर मंत्री जवाब देंगे.
देश में हो सकती है ईंधन से जुड़ी समस्या- राहुल गांधी
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि देश में आने वाले समय में ईंधन से जुड़ी बड़ी समस्या पैदा हो सकती है, क्योंकि भारत की एनर्जी सिक्योरिटी खतरे में पड़ गई है. उन्होंने इसका कारण सरकार की गलत विदेश नीति को बताया और कहा कि अगर समय रहते तैयारी नहीं की गई तो करोड़ों लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
राहुल ने कहा कि मुझे साफ दिख रहा है कि एक बड़ी समस्या आने वाली है. समस्या यह है कि प्रधानमंत्री देश के प्रधानमंत्री की तरह काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके पीछे भी कारण हैं, वे फंसे हुए हैं.
रणनीति और सोच बदलने की जरूरत- राहुल
राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संघर्ष सिर्फ ईरान से तेल मिलने या न मिलने का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक व्यवस्था में बड़े बदलाव से जुड़ा है. उनके मुताबिक दुनिया एक अस्थिर दौर में प्रवेश कर रही है और ऐसे समय में भारत को अपनी रणनीति और सोच बदलने की जरूरत है.
उन्होंने सरकार और प्रधानमंत्री से अपील की कि वे तुरंत तैयारी शुरू करें और यह सुनिश्चित करें कि देश के लोगों को किसी तरह की ऊर्जा संकट का सामना न करना पड़े. राहुल गांधी ने कहा कि यह कोई राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि आने वाले संभावित संकट को लेकर चेतावनी है.
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