TB उन्मूलन प्रोग्राम में हुए घोटाले पर पर्दा डालने की तैयारी, इंचार्ज ने लिखा कर्मचारियों को पत्र

हरियाणा

बहादुरगढ़: केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में बड़े घोटाले को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। झज्जर जिले में इस घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। आरोप है कि डाटा अपडेट करने के नाम पर फर्जी रिकॉर्ड दुरुस्त करने की तैयारी की जा रही है। झज्जर जिले के टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के इंचार्ज उप सिविल सर्जन द्वारा 29 दिसम्बर को कर्मचारियों को डाटा अपडेट करने के लिए पत्र लिखा गया है। इसी को लेकर शिकायतकर्ता अनूप अहलावत ने स्वास्थ्य विभाग पर घोटाले को छुपाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

वहीं बहादुरगढ़ के आदर्श नगर स्थित अर्बन पीएचसी में जांच समिति के सामने बयान देने आए लोगों का कहना है कि जिन लोगों ने बीसीजी का टीका नही लगने के एफिडेविट दिए, उन्हें अब फोन करके धमकाया जा रहा है। आरोप है कि लोगों को पुलिस कार्रवाई और भविष्य में स्वास्थ्य सेवाएं बंद करने का डर दिखाया जा रहा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम उन्हीं लोगों को फर्जी बता रही है, जिन्होंने घोटाले को उजागर करने के लिए एफिडेविट दिए थे।

अनूप अहलावत ने जांच कर रही डॉक्टरों की टीम पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जिले भर के डॉक्टर इस घोटाले में शामिल हैं और वही डॉक्टर मामले की जांच भी कर रहे हैं, जिससे निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। आरोप है कि बिना बीसीजी का टीका लगाए फर्जी तरीके से वैक्सीनेशन का रिकॉर्ड चढ़ाया गया।

जानकारी के अनुसार, बहादुरगढ़ में करीब 20 हजार लोगों को बीसीजी वैक्सीन लगाई जानी थी, जबकि जिले भर में करीब 50 करोड़ रुपये की वैक्सीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं। यह मामला तब सामने आया जब अनूप अहलावत ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव को शिकायत दी, जिसके बाद जांच शुरू हुई।

अब अनूप अहलावत ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करने की बात कही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस मामले में अभी भी मौन हैं।

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