संगम नगरी प्रयागराज में 44 दिवसीय माघ मेले का समागम महाशिवरात्रि के पावन स्नान के साथ संपन्न हो गया. साल 2026 का यह माघ मेला न केवल अपनी अभूतपूर्व भीड़ के लिए याद किया जाएगा, बल्कि कुंभ के पुराने रिकॉर्ड्स को ध्वस्त करने के लिए भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है. मेला प्रशासन का दावा है कि 44 दिनों तक चले इस मेले में कुल 22 करोड़ 10 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई.
यह आंकड़ा इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि इसने कुंभ-2013 के 12 करोड़ के रिकॉर्ड को बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया है. महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान पर्व पर प्रशासन ने 16 लाख की उम्मीद जताई थी, लेकिन सुबह 8 बजे तक ही 15 लाख लोग स्नान कर चुके थे. शाम ढलते-ढलते यह आंकड़ा 40 लाख के पार पहुंच गया.
हर-हर महादेव और हर-हर गंगे के उद्घोष से पूरा मेला क्षेत्र गूंजता रहा. भीड़ का आलम यह था कि सुबह 8 बजे के बाद चार पहिया वाहनों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया. धूप खिलने के साथ ही संगम नोज पर तिल रखने की भी जगह नहीं बची थी.
100 साल की मां को उठाकर पहुंचा ‘कलयुग का श्रवण कुमार’
इस भारी भीड़ और शोर-शराबे के बीच एक ऐसा दृश्य दिखा जिसने हजारों श्रद्धालुओं की आंखों को नम कर दिया. मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के राम भजन यादव अपनी 100 वर्षीय बुजुर्ग मां को कांवड़ की तरह अपने कंधे पर बैठाकर कई किलोमीटर पैदल चलकर संगम तट पहुंचे.
मां की इच्छा थी महाशिवरात्रि पर संगम स्नान करने की
उनकी मां चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ थीं, लेकिन उनकी इच्छा थी कि वह महाशिवरात्रि पर संगम स्नान करें. राम भजन न केवल अपने पिता की अस्थियां विसर्जित करने आए, बल्कि मातृ-भक्ति की एक ऐसी मिसाल पेश की कि मेले में मौजूद हर शख्स उन्हें ‘कलयुग का श्रवण कुमार’ कहने लगा. जब उन्होंने अपनी मां को कंधे पर बैठाकर डुबकी लगवाई, तो श्रद्धालुओं ने उन पर फूलों की वर्षा की और मालाएं पहनाकर उनके इस जज्बे को सलाम किया.
संगम स्नान के बाद श्रद्धालु शहर के प्राचीन शिव मंदिरों- मनकामेश्वर, सोमेश्वर महादेव और नागवासुकि की ओर चल पड़े. रात्रि विश्राम के बाद अब कल्पवासियों और श्रद्धालुओं की घर वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है. प्रशासन के लिए यह मेला एक बड़ी कामयाबी रहा, जिसने आगामी महाकुंभ की तैयारियों के लिए एक मजबूत ब्लूप्रिंट पेश किया है.
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