हाजीपुर (बिहार): बिहार में विकास के मुद्दे पर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच राज्य सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का बड़ा बयान सामने आया है।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधने के साथ-साथ अपनी ही सरकार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पर भी तीखा तंज कसा। हाजीपुर पहुंचे शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को अपनी आंखों का इलाज कराना चाहिए और एक अच्छा चश्मा पहनना चाहिए, ताकि उन्हें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार द्वारा किया जा रहा विकास स्पष्ट रूप से दिखाई दे सके।
उन्होंने कहा कि जब निशांत कुमार उनसे मुलाकात करेंगे, तो वह स्वयं उन्हें विस्तार से दिखाएंगे कि शिक्षा विभाग में किस स्तर पर विकासात्मक कार्य किए जा रहे हैं।
👏 पीएम नरेंद्र मोदी और पूर्व सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व की सराहना
राज्य में विकास और विपक्षी हमलों पर प्रतिक्रिया:
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विकास की रफ्तार: शिक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि दोनों शीर्ष नेताओं ने मिलकर बिहार को विकास के पथ पर काफी आगे बढ़ाया है।
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विपक्ष पर हमला: उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर नकारात्मक राजनीति कर रहा है और उसे सरकार द्वारा धरातल पर किए गए वास्तविक कार्य और उपलब्धियां नजर नहीं आ रही हैं।
⚖️ आरक्षण व्यवस्था और 10% EWS कोटे का पुरजोर समर्थन
आरक्षण विवाद और सामाजिक संतुलन पर पक्ष:
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आरक्षण का समर्थन: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच आरक्षण के मुद्दे पर चल रही बयानबाजी के बीच शिक्षा मंत्री ने आरक्षण व्यवस्था को पूरी तरह न्यायसंगत और आवश्यक बताया।
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सवर्ण व दलित संतुष्ट: उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लागू किया गया 10% ईडब्ल्यूएस (EWS) आरक्षण एक ऐतिहासिक कदम है, जिससे समाज के दलित, पिछड़े और सवर्ण सभी वर्ग संतुष्ट और खुश हैं।
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क्रीमी लेयर व नैतिकता का संदर्भ: उन्होंने उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी इस बात के पक्षधर रहे हैं कि सक्षम व उच्च पदों पर बैठे लोगों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखकर वास्तविक जरूरतमंदों को इसका पूरा लाभ मिलना चाहिए।
🌱 ‘बड़े लोग नैतिकता का पालन करेंगे तो गरीबों का खुद-ब-खुद होगा कल्याण’
सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक आचरण पर विचार:
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नैतिक जिम्मेदारी: मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि समाज के शीर्ष व संपन्न पदों पर आसीन लोगों को कानून और संविधान के साथ-साथ उच्च नैतिक मापदंडों का भी स्वतः पालन करना चाहिए।
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निचले तबके का उत्थान: उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि समाज के सक्षम और प्रभावशाली वर्ग अपनी नैतिक जिम्मेदारियों को समझेंगे और स्वेच्छा से जरूरतमंदों के अधिकारों का सम्मान करेंगे, तो समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों का कल्याण स्वतः और तेजी से होने लगेगा।
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