डीजी आईजी कॉन्फ्रेंस का दूसरा दिन, पीएम नरेंद्र मोदी आज 4 अहम सत्र में होंगे शामिल

छत्तीसगढ़

रायपुर: नवा रायपुर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) में डीजीपी-आईजी कॉन्फ्रेंस का आज दूसरा दिन है. आज के सत्र में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार रात रायपुर पहुंचे. आज और कल पीएम मोदी रायपुर में ही रहेंगे और राष्ट्रीय सुरक्षा के अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे.

3 दिवसीय कॉन्फ्रेंस में कुल 8 सत्र, पीएम छह में होंगे शामिल

आईआईएम परिसर में तीन दिनों तक चलने वाले इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में कुल 8 सत्र आयोजित किए जा रहे हैं. पहले दिन 2, दूसरे दिन 4 और तीसरे दिन 2 सत्र निर्धारित हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरे और तीसरे दिन होने वाले कुल 6 महत्वपूर्ण सत्रों में शामिल होकर सुरक्षा संबंधी विभिन्न विषयों पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ सीधे संवाद करेंगे. इन सत्रों में आंतरिक सुरक्षा, आधुनिक पुलिसिंग, नए सुरक्षा खतरों और तकनीकी सुधारों पर खास फोकस रहेगा.

राष्ट्रीय सुरक्षा के अहम मुद्दों पर खुला मंथन

यह सम्मेलन देशभर के पुलिस महानिदेशक, आईजी स्तर के अधिकारी और सुरक्षा प्रशासकों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सीधे संवाद का बड़ा मंच बन चुका है. इसमें पुलिस बलों के सामने आने वाली परिचालन संबंधी चुनौतियों, अवसंरचनागत जरूरतों, पुलिसकर्मियों के कल्याण, अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था और आतंकवाद व नक्सलवाद जैसे आंतरिक खतरों से निपटने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हो रही है. यह मंच न केवल समस्याओं का विश्लेषण करता है, बल्कि श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान और नई रणनीतिक दिशा भी प्रदान करता है.

डीजीपी आईजी कॉन्फ्रेंस के पहले दिन क्या हुआ

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में तीन दिवसीय 60वीं DGP/IGP कॉफ्रेंस का उद्घाटन किया. उद्घाटन समारोह के बाद अपने संबोधन में अमित शाह ने नक्सलवाद, आतंकवाद और उग्रवाद, नारकोटिक्स और organised क्राइम पर 360 डिग्री प्रहार तंत्र बनाने पर जोर देने को कहा. केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले 7 साल में 586 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाकर सुरक्षा घेरे को मजबूत बनाया है. इसी का परिणाम है कि 2014 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 थी जो आज घटकर सिर्फ 11 रह गई है. अमित शाह ने कहा कि अगली DGsP/IGsP कॉन्फ्रेंस से पहले देश नक्सलवाद की समस्या से पूर्णतः मुक्त हो जाएगा.

2014 से सम्मेलन के स्वरूप में आए बड़े बदलाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 से इस सम्मेलन में लगातार सुधार किए गए हैं. पहले यह बैठकें केवल राष्ट्रीय राजधानी तक सीमित रहती थीं, लेकिन अब इन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित किया जाता है ताकि राज्यों की सुरक्षा परिस्थितियों को नजदीक से समझा जा सके. इसी क्रम में यह सम्मेलन गुवाहाटी, कच्छ का रण, हैदराबाद, टेकनपुर (ग्वालियर), केवड़िया (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी), पुणे, लखनऊ, दिल्ली, जयपुर और भुवनेश्वर जैसे स्थानों पर आयोजित हो चुका है. इस बार छत्तीसगढ़ इसकी मेजबानी कर रहा है, जो राज्य के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है.

2000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी संभाल रहे सिक्योरिटी

अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ पहली बार इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है और नवा रायपुर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. सम्मेलन के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था में 2000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात हैं.

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