पीरियड्स के दौरान ठंडी चीजों या पानी के सेवन को लेकर समाज में कई तरह की मान्यताएं हैं। भारत में दादी-नानी के कई नुस्खे आज भी फॉलो किए जाते हैं, जिनमें से कुछ सही होते हैं तो कुछ महज मिथक होते हैं। ऐसा ही एक बड़ा सवाल यह है कि क्या पीरियड्स के दौरान ठंडा पानी पीना चाहिए या नहीं? ज्यादातर महिलाओं का मानना होता है कि ठंडा पानी पीने से ब्लड फ्लो में रुकावट आती है, लेकिन आइए जानते हैं कि क्या वाकई ऐसा है या यह सिर्फ एक भ्रम है।
👩⚕️ एक्सपर्ट्स के अनुसार क्या है सच्चाई?
अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल जयपुर की सीनियर कंसल्टेंट आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी डॉ. मानिनि पटेल बताती हैं कि पीरियड्स के दौरान ठंडा पानी पीने से पीरियड्स रुकने या दर्द बढ़ने की बात पूरी तरह एक मिथक है। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है। पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द और ऐंठन मुख्य रूप से हार्मोनल बदलावों और गर्भाशय (यूटेरस) की मांसपेशियों के सिकुड़ने के कारण होती है, जिसमें प्रोस्टाग्लैंडिन नामक हार्मोन अहम भूमिका निभाता है।
💧 पीरियड्स में शरीर को हाइड्रेट रखना है सबसे जरूरी
डॉक्टर का कहना है कि माहवारी के दौरान शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद आवश्यक है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से डिहाइड्रेशन से बचा जा सकता है और थकान, कमजोरी व सिरदर्द जैसी परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है। महिलाएं अपनी पसंद और शरीर की स्थिति के अनुसार नॉर्मल या ठंडा पानी पी सकती हैं।
☕ गुनगुना पानी पीना भी है एक अच्छा विकल्प
हालांकि, हर महिला का शरीर अलग होता है। कुछ महिलाओं को ठंडा पानी पीने के बाद ब्लोटिंग, पेट में भारीपन या हल्की असहजता महसूस हो सकती है, ऐसी स्थिति में वे गुनगुना पानी चुन सकती हैं। इस दौरान हेल्दी डाइट लेना और शरीर को आराम देना सबसे जरूरी है। यदि दर्द या ब्लीडिंग बहुत अधिक हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
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