पटना में नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और दुष्कर्म की आशंका से जुड़े मामले में स्पेशल पॉक्सो कोर्ट (Special POCSO Court) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) को 68 और मृतका की मां को 39 सवालों की एक लंबी सूची सौंपकर विस्तृत जवाब तलब किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर 2026 को तय की गई है। सुनवाई के दौरान सीबीआई की जांच अधिकारी विभा कुमारी, पटना पुलिस की तत्कालीन आईओ डॉ. अनु कुमारी और मृतका के परिजन अदालत में उपस्थित रहे।
🔍 सीबीआई से पूछे गए मुख्य सवाल और जांच के बिंदु
अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर तीखे सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या एजेंसी का यह अंतिम रुख है कि इस मामले में कोई आपराधिक घटना हुई ही नहीं? इसके अलावा, पीड़िता के यौन उत्पीड़न के निष्कर्ष, अंतर्वस्त्रों की फॉरेंसिक जांच में वीर्य या जैविक साक्ष्य, डीएनए पहचान की वैज्ञानिक सीमा, हॉस्टल की पाँचवीं मंजिल के कमरे को सील करने का कानूनी अधिकार, तथा दवाइयों की जब्ती और सीसीटीवी/डीवीआर के भौतिक मिलान से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर स्पष्टीकरण माँगा गया है। साथ ही, बिहार पुलिस की पूर्ववर्ती जांच की केस डायरी और मेडिकल रिपोर्ट का भी गहराई से विश्लेषण करने को कहा गया है।
👩👦 मृतका की मां और पीड़ित परिवार के गंभीर आरोप: प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल कर खारिज करने की मांग
सुनवाई के दौरान मृतका की मां से भी बेटी के स्वास्थ्य, डिप्रेशन की दवाओं, हॉस्टल को लेकर शिकायतों और घटना के दिन की बातचीत से जुड़े 39 सवाल पूछे गए हैं। बता दें कि इस मामले में 11 जनवरी को छात्रा की मौत के बाद पटना पुलिस जांच कर रही थी, जिसके बाद 12 फरवरी 2026 को सीबीआई ने केस टेकओवर किया था और 6 अक्टूबर 2026 को क्लोजर रिपोर्ट सौंपी थी। पीड़ित परिवार ने अदालत में विरोध सह परिवाद पत्र (Protest Petition) दायर कर सीबीआई की जांच को पक्षपातपूर्ण बताया है। परिवार का आरोप है कि मुख्य आरोपी हॉस्टल संचालक मनीष कुमार रंजन को रिमांड पर लेकर पूछताछ नहीं की गई और 90 दिनों में चार्जशीट न दाखिल होने के कारण उसे जमानत मिल गई, इसलिए क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दोबारा निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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