पानीपत: एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) करनाल की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए तहसील कैंप थाने के एक हवलदार को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। हवलदार सतीश पर आरोप है कि उसने एक युवक को पुलिस हिरासत से छोड़ने के बदले में 15,000 रुपये की रिश्वत ली थी। इस कार्रवाई के दौरान थाने के एक ASI से भी पूछताछ की गई, जिसके बाद हवलदार को एसीबी टीम ने अपने शिकंजे में ले लिया।
💰 क्या है रिश्वत मांगने का पूरा मामला?
शिकायतकर्ता पवन ने बताया कि बुधवार देर रात उसका भाई एक अंडे की रेहड़ी के पास खड़ा था, जहाँ एक नाबालिग भी मौजूद थी। गश्त के दौरान तहसील कैंप थाने की पुलिस उन दोनों को पकड़कर थाने ले आई। नाबालिग को तो परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया, लेकिन पवन के भाई को पुलिस ने थाने में ही बैठाए रखा। गुरुवार सुबह जब परिवार थाने पहुँचा, तो हवलदार सतीश ने युवक को छोड़ने की एवज में 20 हजार रुपये की मांग की। बाद में सौदा 15 हजार रुपये में तय हुआ और उसे शाम तक पैसे लेकर थाने बुलाया गया। पुलिस ने धमकी दी थी कि यदि रिश्वत नहीं दी गई, तो उसके भाई को जेल भेज दिया जाएगा।
🚔 ACB की जालसाजी और गिरफ्तारी
इस मामले की शिकायत मिलते ही पानीपत में एसपी ममता सिंह के निर्देश पर एसीबी करनाल के इंस्पेक्टर निर्मल सिंह के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया। जैसे ही पवन ने हवलदार सतीश को 15 हजार रुपये की रिश्वत दी, वैसे ही एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह पूरी कार्रवाई गुरुवार रात करीब साढ़े 8 बजे से पौने 12 बजे तक चली।
⚖️ जांच के दायरे में ASI की भूमिका
एसीबी की टीम ने देर रात गिरफ्तार हवलदार का नागरिक अस्पताल में मेडिकल कराया और उसे पानीपत एसीबी टीम के सुपुर्द कर दिया। करनाल एसीबी प्रभारी निर्मल सिंह ने बताया कि हवलदार सतीश को 15,000 रुपये लेते हुए पकड़ा गया है। वहीं, थाने के एएसआई संजय पर भी रिश्वतखोरी के आरोप लगे हैं। फिलहाल, एएसआई की भूमिका की गहन जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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