पंचायत….अमेजन प्राइम वीडियो की वो वेब सीरीज है, जिसे देखकर शहरी लोग भी गांव की खटिया पर लेटे हुए बिसरे हुए रिश्तों की बातें करने लगते हैं. 8 साल से लगातार दर्शकों के दिलों पर राज करने वाला ये शो अपने चौथे सीजन के साथ लौट आया है. ‘पंचायत’ ने पहले तीन सीजन में दिखा दिया था कि बिना गालियों, ग्लैमर या बड़े-बड़े ट्विस्ट के भी एक कहानी कैसे लाखों दिलों को जीत सकती है. लेकिन, अब जब सीजन 4 मैदान में है, तो सवाल ये है कि क्या फुलेरा वालों ने इस बार दिल जीता या बस पुराना स्वाद ही चखाया? आइए बिना किसी लाग-लपेट के सीधे मुद्दे की बात करते हैं.
पहले तीनों सीजन ने अपनी पहचान एक ‘कंफर्ट वॉच’ के रूप में बनाई थी, जो धीमी गति से चलती थी लेकिन अपने किरदारों और उनके छोटे-मोटे झगड़ों से दर्शकों को बांधे रखती थी. सीजन 1 में अभिषेक का गांव से तालमेल बिठाना, सीजन 2 में प्रधानी चुनाव की गहमागहमी और बनराकस का बढ़ता दबदबा, और सीजन 3 में प्रधान जी पर हमले का प्लॉट हर सीजन में कुछ खास था, जो कहानी को आगे बढ़ाता था. सीजन 4 में भी ये सब कुछ है, लेकिन क्या इस बार भी वो नयापन है, जो पिछले सीजन में था? इसका जवाब है – थोड़ा हां, थोड़ी ना!
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