प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): नोएडा मजदूर विरोध प्रदर्शन से जुड़े संवेदनशील मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी की जमानत व एनएसए (NSA) रद्द करने की याचिका पर सुनवाई की।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने पूछा कि एफआईआर (FIR) दर्ज करने से पूर्व शांति भंग की कोई आधिकारिक नोटिस दी गई थी या नहीं। इसके साथ ही अदालत ने मजदूरों को भड़काने से संबंधित वीडियो फुटेज और व्हाट्सएप चैट का पूरा विवरण पेश करने के निर्देश दिए हैं।
📌 निचली अदालतों से राहत न मिलने के बाद हाईकोर्ट पहुंचीं: 4 में से 3 मामलों में खारिज हुई थी जमानत
मामले की कानूनी पृष्ठभूमि:
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सत्र अदालत का रुख: ग्रेटर नोएडा की सत्र अदालत ने आकृति चौधरी की 4 में से 3 जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जबकि केवल एक मामले में उन्हें राहत मिली थी।
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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने सीधे जमानत देने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का निर्देश दिया था।
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NSA रद्द करने की मांग: हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में आकृति चौधरी के खिलाफ लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को निरस्त करने और उन्हें नियमित जमानत देने की गुहार लगाई गई है।
🔍 ‘पथराव और आगजनी कराने का क्या सबूत है?’: हाईकोर्ट ने सरकार से पूछे तीखे सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणियां:
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भड़काने के ठोस प्रमाण की मांग: सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य सरकार से सीधा सवाल किया कि यह कहां दर्ज है कि आकृति ने भीड़ जुटाई थी और लोगों को पथराव करने या गाड़ियों में आग लगाने के लिए उकसाया था।
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चार्जशीट और गवाहों के बयान: जब राज्य सरकार ने बताया कि आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल हो चुका है, तो पीठ ने कहा कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद राज्य को यह स्पष्ट करना चाहिए था कि गवाहों ने विशेष रूप से किस आधार पर नाम लिया है।
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वीडियो फुटेज पर सवाल: अदालत ने कथित घटना की वीडियोग्राफी का हवाला देते हुए पूछा कि फुटेज में आकृति चौधरी को प्रदर्शनकारियों को उकसाते हुए कहां दिखाया गया है।
⏳ अतिरिक्त समय देने से कोर्ट का इनकार: 5 महीने से हिरासत में हैं आकृति चौधरी
सुनवाई का निष्कर्ष और अगली तारीख:
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समय मांगने पर सख्ती: राज्य सरकार की ओर से वीडियो साक्ष्य जुटाकर पेश करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया, जिसे अदालत ने साफ तौर पर खारिज कर दिया।
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जस्टिस श्रीधरन की टिप्पणी: जस्टिस अतुल श्रीधरन ने सख्त लहजे में कहा कि आरोपी पहले ही 5 महीने से जेल में बंद हैं, इसलिए अदालत और अधिक अतिरिक्त समय नहीं देगी।
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अगली सुनवाई: राज्य सरकार के विशेष अनुरोध पर सहमति जताते हुए हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई निर्धारित समय पर तय की है।
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