Noida Crime News: नोएडा श्रमिक हिंसा का मुख्य आरोपी नरेश कुमार गिरफ्तार; विपुल मोटर्स के पास गाड़ियों में लगाई थी आग

दिल्ली

नोएडा: उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर नोएडा में बीते 13 अप्रैल को श्रमिक आंदोलन के नाम पर हुई भीषण हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की वारदातों में शामिल एक और बड़े मास्टरमाइंड आरोपी को गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट पुलिस ने सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया है। नोएडा पुलिस के आला अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए शातिर आरोपी की पहचान 45 वर्षीय नरेश कुमार के रूप में हुई है। आरोपी नरेश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले का रहने वाला है और वर्तमान में नोएडा के सेक्टर-63 स्थित चोटपुर कॉलोनी इलाके में किराए के मकान में रह रहा था। पुलिस ने बताया कि आरोपी सेक्टर-63 में ही स्थित ‘महावीरा कंपनी’ में टेलर (दर्जी) के पद पर कार्यरत था और उसी ने सुनियोजित तरीके से आंदोलन के दौरान सीधे-साधे मजदूरों को भड़काकर हिंसा और दंगा फैलाने में सबसे अहम भूमिका निभाई थी।

पुलिस की गहन शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि 13 अप्रैल की सुबह नरेश कुमार जानबूझकर महावीरा कंपनी परिसर पहुंचा और वहां काम कर रहे अन्य कर्मचारियों को जबरन हड़ताल करने के लिए भड़काने लगा। इसके बाद वह एक सोची-समझी रणनीति के तहत बड़ी संख्या में आक्रोशित मजदूरों की उग्र भीड़ को लेकर मुख्य सड़क पर उतर आया। देखते ही देखते सेक्टर-63 के औद्योगिक क्षेत्र में हजारों की भीड़ जमा हो गई और वहां का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। एफआईआर के अनुसार, यह हिंसक भीड़ नारेबाजी करते हुए विपुल मोटर्स (Vipul Motors) के शोरूम के पास पहुंची, जहां सुनियोजित तरीके से बाहर खड़ी दर्जनों चार पहिया और दो पहिया गाड़ियों में पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई। आग इतनी भीषण थी कि देखते ही देखते कई नई गाड़ियां जलकर पूरी तरह खाक हो गईं। यही नहीं, उपद्रवियों ने लोहे के पाइप, पत्थरों और अन्य धारदार सामानों से राहगीरों के वाहनों में भी भारी तोड़फोड़ की, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल फैल गया था।

🕵️ वीडियो फुटेज और सर्विलांस की मदद से दबोचा गया दंगाई: गिरफ्तारी से बचने के लिए बदला था मोबाइल नेटवर्क

इस हाईप्रोफाइल मामले का खुलासा करते हुए नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि सेक्टर-63 में हुई यह हिंसा अचानक या स्वतःस्फूर्त नहीं भड़की थी, बल्कि इसे एक बड़ी साजिश के तहत योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया था। घटना के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और पुलिस की फॉरेंसिक तकनीकी जांच (Technical Analysis) के जरिए मुख्य आरोपी नरेश कुमार की पहचान पुख्ता की गई। सीसीटीवी और मोबाइल वीडियो में नरेश कुमार खुद हाथों में डंडा लिए आगजनी और हिंसा का नेतृत्व करते हुए साफ दिखाई दे रहा था। बैकग्राउंड जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और वह इससे पहले हरियाणा के मानेसर में हुए हिंसक श्रमिक आंदोलनों और विवादों से भी सक्रिय रूप से जुड़ा रहा है।

माइनिंग और साइबर टीम ने जब आरोपी के मोबाइल फोन को खंगाला, तो उसके पास से प्रतिबंधित श्रमिक यूनियनों से जुड़े कई संदिग्ध डिजिटल दस्तावेज और व्हाट्सएप चैट रिकॉर्ड भी बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, 13 अप्रैल की घटना के बाद अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए शातिर आरोपी ने चालाकी दिखाते हुए अपना चालू मोबाइल नंबर तुरंत दूसरी टेलीकॉम कंपनी में पोर्ट (MNP) करा लिया था ताकि पुलिस उसकी लोकेशन ट्रेस न कर सके। लेकिन नोएडा पुलिस के एडवांस सर्विलांस सेल और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से उसे दिल्ली-एनसीआर के बॉर्डर के पास से ट्रैक कर दबोच लिया गया।

⚖️ रूपेश राय और आकृति चौधरी समेत अब तक 6 से ज्यादा आरोपी जेल में: अन्य फरार उपद्रवियों की तलाश में दबिश जारी

गौतमबुद्ध नगर पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस व्यापक हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के गंभीर मामले में नोएडा और ग्रेटर नोएडा के विभिन्न थानों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन धाराओं के तहत कई अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। पुलिस प्रशासन उपद्रवियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है।

इस दंगा मामले में नोएडा पुलिस अब तक मुख्य साजिशकर्ता रूपेश राय, हिमांशु ठाकुर, सत्यम वर्मा, महिला विंग की आकृति चौधरी और सुमित समेत 6 से अधिक बड़े आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज चुकी है। पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि वीडियो फुटेज के आधार पर चिन्हित किए गए बाकी फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की विशेष टीमें दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में लगातार छापेमारी कर रही हैं और जल्द ही सभी उपद्रवियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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