जयपुर के ऐतिहासिक परकोटे क्षेत्र में अब भीड़ और ट्रैफिक जाम से लोगों को राहत मिलने वाली है. परकोटे के अंदर ई-रिक्शा के संचालन पर बैन लगाया गया है. हालांकि, ये बैन हमेशा के लिए नहीं, बल्कि कुछ दिनों के लिए लगाया गया है. इस कदम का मकसद तंग गलियों में भीड़ को काबू करना और पैदल यात्रियों और पर्यटकों की सुविधा बढ़ाना है. अधिकारियों के मुताबिक, ई-रिक्शा बैन होने से जाम की समस्या कम होगी और पर्यटक बिना किसी परेशानी के पिंक सिटी की सैर का आनंद ले सकेंगे.
परकोटे की चारदीवारी में शनिवार से ही ई-रिक्शा की एंट्री बंद कर दी गई. ऐसे में करीब 9 हजार ई-रिक्शा की चारदीवारी में एंट्री बंद हो गई. जैसे ही ई-रिक्शा परकोटे में बंद हुईं, यहां बाकी गाड़ियों को रफ्तार मिल गई और छोटी चौपड़ खुली-खुली नजर आई. ई-रिक्शा पर बैन लगाने का फैसला पर्यटन सीजन को देखते हुए लिया गया है. ऐसे में इस फैसले से पैदल यात्रियों और पर्यटकों को सुविधा मिलेगी और छोटी चौपड़ से बड़ी चौपड़ और हवा महल तक घूमना पहले से कहीं ज्यादा आसान और सुरक्षित हो जाएगा.
10 जनवरी तक नजर नहीं आएंगी ई-रिक्शा
ये बैन 22 दिन तक जारी रहेगा, यानी 22 दिन तक चारदीवारी में कोई भी ई-रिक्शा नजर नहीं आएगी. इस बैन के बाद पहले ही दिन काफी बदलाव नजर आया, जहां वाहन रेंगते रहते थे. वहां वाहनों ने खुली जगह पर एक दम रफ्तार पकड़ी. यहां गाड़ियां 30 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलती नजर आईं. अब 10 जनवरी तक आमेर और चारदीवारी क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए ई-रिक्शा और अवैध वाहनों पर पूरी तरह रोक रहेगी.
ऑटो चालकों की मनमानी हो गई शुरू
इस दौरान स्लो मूविंग और हल्के मालवाहक वाहनों की एंट्री सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक बैन रहेगी. पर्यटक बसों को सांगानेरी गेट से एंट्री की इजाजत दी जाएगी, जबकि उन्हें रामगढ़ मोड़ से बाहर निकाला जाएगा. इधर ई-रिक्शा के बंद होने के बाद ऑटो चालकों की मनमानी सामने आने लगी. यात्रियों का आरोप है कि बड़ी चौपड़ से छोटी चौपड़ के बीच तय किराए से ज्यादा वसूली की जा रही है और एक छोटे से सफर के लिए 50 रुपये तक लिए जा रहे हैं.
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