217 स्टोन क्रशर इकाइयों की पर्यावरणीय अनुपालना को लेकर पहली सुनवाई में ही राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सख्त रुख अपनाया। नई दिल्ली में हुई सुनवाई के दौरान अधिकरण ने संयुक्त समिति को चार सप्ताह में अंतिम रिपोर्ट दाखिल ने करने के आदेश दिए हैं। एनजीटी की प्रधान पीठ में यह मामला सुखदीप सिंह बनाम हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं अन्य ने सुना। पीठ की न अध्यक्षता न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने की।
सदस्य डा. अफरोज अहमद र भी मौजूद रहे। मामला यमुनानगर में र स्टोन क्रशर इकाइयों द्वारा पर्यावरणीय और साइटिंग मानकों के पालन से न जुड़ा है। रिपोर्ट में बताया किया कि 40 इकाइयां (प्लांट) मौके पर नहीं मिले, जबकि 50 को हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बंद किया न है। 127 प्लॉट चल रहे हैं। निरीक्षण में 51 प्लांट मौके पर गैर-संचालित में मिलीं, लेकिन सभी पर्यावरणीय मानकों पर विफल पाए गए। सभी 51 इकाइयां पर्यावरणीय मानको की अवेहलना करती मिली थीं।
17 फरवरी की प्रगति रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि समिति ने 51 इकाइयों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के समय सभी इकाइयां गैर-संचालित मिली। इनमें से 11 इकाइयां पूर्व उल्लंघनों के कारण पहले ही बोर्ड द्वारा बंद की जा चुकी थीं।
ये खामी मिली मौके पर
अधिकांश क्रशरों में धूल नियंत्रण और पानी के छिड़काव के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। कई स्थानों पर प्रदूषण नियंत्रण उपकरण बंद या कम क्षमता पर मिले। कचरा निपटान और श्रमिक सुरक्षा के प्रबंध अधूरे पाए गए। प्रत्येक स्टोन क्रशर परिसर में कम से कम 50 पानी के फव्वारे, दो कतारों में पौधारोपण, पक्का मार्ग, चारदीवारी और डिस्चार्ज प्वाइट पर पर्दे जैसी व्यवस्थाएं जरूरी है, लेकिन मौके पर व्यापक अनदेखी मिली थी। पर्यावरणविद डाक्टर केआर भारद्वाज का कहना है कि स्टोन क्रशर का राष्ट्रीय और राज्य मार्ग से कम से कम 500 मीटर, नगर निगम सीमा से दो किमी, नगरपालिका सीमा से एक किमी, अस्पताल से एक किलोमीटर और शिक्षण संस्थान व गांव की फिरनी से आधा किलोमीटर दूरी जरूरी है।
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