मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की रहने वाली 18 वर्षीय आकांक्षा चतुर्वेदी की आत्महत्या ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। डॉक्टर बनने का सपना संजोए इस मेधावी छात्रा ने कथित तौर पर फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। आकांक्षा मूल रूप से मऊगंज जिले के मगनिया गांव की निवासी थी। बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए उसका परिवार नागपुर में शिफ्ट हो गया था। उसके पिता कृष्ण कुमार चौबे एक किसान हैं, लेकिन बेटी के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने नागपुर में कुक का काम भी किया। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के बावजूद, उन्होंने बेटी की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी।
📝 सुसाइड नोट का खुलासा: “दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत नहीं बची”
परिजनों के अनुसार, आकांक्षा ने नीट परीक्षा की तैयारी के लिए बेहद मेहनत की थी और वह परीक्षा को लेकर आश्वस्त थी। लेकिन परीक्षा के बाद सामने आईं विवादित खबरों और अनिश्चितताओं ने उसे गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया। 20 मई 2026 को उसने अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसके पास से मिले सुसाइड नोट में उसने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि उन्हें उस पर डॉक्टर बनने का जो भरोसा था, वह उसे पूरा नहीं कर सकी। उसने आगे लिखा कि उसे दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत नहीं बची है और भविष्य को लेकर वह काफी डरी हुई थी।
💰 शिक्षा का भारी बोझ: तीन लाख का कर्ज और टूटे सपने
परिवार के मुताबिक, बेटी की पढ़ाई के लिए ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ (KCC) के माध्यम से लगभग तीन लाख रुपये का कर्ज लिया गया था। इसके अलावा रिश्तेदारों और परिचितों से भी आर्थिक मदद ली गई थी। आकांक्षा की असामयिक मौत ने परिवार को न केवल भावनात्मक रूप से तोड़ा है, बल्कि उन पर आर्थिक बोझ का पहाड़ भी खड़ा कर दिया है।
⚖️ राजनीतिक सरगर्मी: न्याय और आर्थिक मदद की मांग
इस घटना के बाद अब सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस और विभिन्न संगठनों के नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की है। पार्टी की ओर से 2.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता पहुँचाई गई है और परिवार पर मौजूद कर्ज को चुकाने में सहयोग का आश्वासन भी दिया गया है। विपक्षी नेताओं ने इस घटना को युवाओं पर बढ़ते मानसिक दबाव और परीक्षा प्रणाली की खामियों से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा है। आकांक्षा की मौत ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के सामने खड़े आर्थिक बोझ और पारदर्शिता के गंभीर सवालों को जीवित कर दिया है।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad