राष्ट्र हमारे लिए मातृभूमि है और उनके लिए मात्र भूमि, भारत माता को कहा गया डायन : संतोष पाण्डेय

छत्तीसगढ़

रायपुर : भारतीय जनता पार्टी के सांसद संतोष पाण्डेय ने वन्देमातरम् की 150वीं वर्षगांठ के दृष्टिगत हुई विशेष चर्चा में हिस्सा लिया. इस दौरान सांसद ने लोकसभा में वन्दे मातरम् पर आभार प्रकट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते समय हमारा मस्तक कृतज्ञता से झुक जाता है. गुलामी के चिह्नों को मिटाने का कार्य प्रधानमंत्री मोदी ने किया है. स्वतंत्रता की लड़ाई में वन्दे मातरम् ने युवाओं में प्राण फूंकने का काम किया.वन्दे मातरम् का अर्थ है— माता की आराधना. यह उस माता की आराधना है, जिसकी गोद में हम खेलते हैं और जीवन में आगे बढ़ते हैं.

वेद और ग्रंथों में धरती माता का वर्णन

भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय ने कहा कि हमारे वेद और ग्रंथों में ऋषियों और संतों ने धरती की आराधना की बात कही है.1965 के भारत–चीन युद्ध के दौरान संसद में पंडित नेहरू ने कहा था कि अक्साई चीन ऐसी बंजर भूमि है जहां घास का एक तिनका भी नहीं उगता, इस पर संसद में भाई महावीर त्यागी ने अपनी टोपी उतारकर अपना गंजा सिर दिखाते हुए कहा— यहां भी एक तिनका नहीं उगता तो क्या इसे भी उन्हें दे दें?

कांग्रेस के नेताओं ने भारत माता को कहा डायन

संतोष पाण्डेय ने कहा कि हमारी जन्मभूमि हमारी मातृभूमि है, पूरा देश जानता है कि अक्साई चीन पर चीन के कब्जे को लेकर कांग्रेस की सरकार उदासीन रही. कांग्रेस और नेहरू के लिए देश महज जमीन का एक टुकड़ा था. भारत भूमि पर जन्म लेने के लिए देवता भी तरसते हैं, पर विपक्ष के मन में जन्मभूमि के प्रति कोई भाव नहीं है.कांग्रेस के नेता कहते थे—“इंदिरा इज इण्डिया ” इनके लिए इंदिरा गांधी ही इंडिया हैं. कांग्रेस के नेता भारत माता को ‘डायन’ कहते हैं.वन्दे मातरम् के गौरव के प्रति हम सबको जागृत करने की आवश्यकता है.वन्दे मातरम् को जन–जन तक पहुँचाया जाए, यही मेरी कामना है.

कांग्रेस सांसद ने पूछा सवाल

कांग्रेस सांसद ज्योत्सना महंत ने वंदे मातरम् पर बोलते हुए कहा कि वंदे मातरम् में हमारे देश की सुंदरता का वर्णन है. यहां की हरियाली,पेड़ पौधे पक्षी,पहाड़ और नदियों की सुंदर व्याख्या है.लेकिन मौजूदा सरकार इन सभी चीजों को बचाने में नाकाम रही है. आदिवासी के जल जंगल और जमीन को छीना जा रहा है.जंगलों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है,बात देश की राजधानी की करें तो यहां की हवा में जहर घुल चुका है.यहां कोई भी ठीक ढंग से सांस नहीं ले सकता है. मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि इस देश में अब कुछ भी सुरक्षित नहीं है.ना देश में महिलाएं सुरक्षित हैं, ना प्रकृति सुरक्षित है और ना ही देश की जनता सुरक्षित है.यदि वंदे मातरम् के 150वीं वर्षगांठ में यदि कुछ करना है तो सरकार को चाहिए कि वो इस गीत की तरह देश का निर्माण करें.

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