उज्जैन: एक और पूरे देश मे मध्यप्रदेश पराली जलाने के मामले में टॉप पर बताया जा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर इस समस्या से निपटने के लिए उज्जैन के किसान खेती के तरीके बदलते नजर आ रहे हैं. पराली जलाने की परंपरा को छोड़ अब किसान आधुनिक तकनीक अपना रहे है. पराली की समस्या से निपटने के किसान मल्चर मशीन का उपयोग कर रहे हैं, जो गेमचेंजर साबित हो रही है.
पराली की समस्या का समाधान है मल्चर मशीन
इस मशीन में तेजी से घूमने वाली ब्लेड और हथौड़े लगे होते हैं, जो फसल के अवशेषों को बारीक टुकड़ों में काटकर खेत में ही फैला देते हैं. इससे किसानों को पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ती और वायु प्रदूषण भी नहीं होता और जीव जंतु भी नहीं जलते. खास बात यह है इससे मिट्टी की उर्वरकता बढ़ती है. क्योंकि अवशेष मिट्टी में मिलकर खाद बन जाते हैं. साथ ही अगली फसल के लिए जमीन जल्दी तैयार होती है. किसान मशीन को ट्रेक्टर में लगाकर नरवाई प्रबंधन कर रहै हैं, जिससे काफी फायदा हो रहा है.
मशीन एक फायदे अनेक
दक्षिण विधानसभा के किसान भरत सिंह ने कहा, ” मध्यप्रदेश सरकार की इस पहल से दोहरे फायदे हैं. एक तो पर्यावरण सुरक्षित, दूसरा जमीन की गुणवत्ता में सुधार और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद व जीव जंतु जलने का डर खत्म.” किसान अजय पटेल ने बताया, ” ये मशीन ना केवल हम किसानों की आय बढ़ाएगी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है.” किसानों ने बताया कि 1 घन्टे में 2 बीघा खेत पर ये काम करती है और 3 से 4 लीटर डीजल की खपत करती है.
उज्जैन की 20 पंचायतों में पहुंची मल्चर मशीनें, नहीं देना होगा किराया
किसानों के लिए यह पहल साल 2026 किसान कल्याण के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा पर शुरू की गई है. मध्यप्रदेश सरकार ने उज्जैन स्थित दक्षिण विधानसभी की 20 ग्राम पंचायतों में ये मशीनें निशुल्क पहुंचाई हैं. उज्जैन जनपद के गांव वृंदावन तालोद के किसानों ने इसे उपहार बताया और सीएम के प्रति आभार जताया.
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