इंदौर: मध्य प्रदेश में गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं होने से परेशान किसान अब सरकार के खिलाफ ही मोर्चा संभालने को तैयार हैं. आरएसएस की अनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ ने खरीदी की मांग और किसानों की कई समस्याओं को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ 15 मई से तहसील स्तर पर आंदोलन की घोषणा की है.
समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का मामला
मध्य प्रदेश में 16 मार्च से गेहूं की नई आवक और फसल की समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू होनी थी लेकिन वह 1 अप्रैल को भी शुरू नहीं हो सकी. 3 बार तारीख आगे बढ़ाई जा चुकी है. हालांकि अब सरकार ने 10 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर खरीदी की घोषणा की है. किसानों की कई समस्याओं के साथ इस स्थिति को लेकर भारतीय किसान संघ ने सरकार के खिलाफ घेराव और विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है.
‘गेहूं बेचने में किसानों को हो रहा नुकसान’
भारतीय किसान संघ मालवा प्रांत के अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण पटेल ने बुधवार को पत्रकारों से चर्चा की. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा “कृषि उपज मंडी में समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं होने से उच्च कोटि का जो गेहूं 2700 प्रति क्विंटल बिकना चाहिए वह मंडी व्यापारी 2000 से 2200 रुपए क्विंटल खरीद कर किसानों को लूटने में लगे हैं.
‘वारदाना नहीं होने की बात पूरी तरह से झूठी’
लक्ष्मी नारायण पटेल ने कि सरकार किसान कल्याण वर्ष मना रही है और जगह-जगह कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है. इसके बावजूद गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू नहीं की. राज्य सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू नहीं होने के पीछे युद्ध के दौरान बाहर से आने वाला वारदाना उपलब्ध नहीं होने की बात की है लेकिन यह बात पूरी तरह गलत है. वारदाने की सरकार ने पहले से व्यवस्था क्यों नहीं की. युद्ध तो अभी चालू हुआ है. इससे किसानों को दुगना नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा फिलहाल समर्थन मूल्य 2615 रुपए है इसमें ₹40 का बोनस है लेकिन सरकार समर्थन मूल्य पर खरीदी के नाम पर लगातार बहाने बना रही है.”
पराली जलाने पर एफआईआर का विरोध
मालवा प्रांत के अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण पटेल ने कहा कि “गेहूं की नरवाई जलाने पर किसानों पर लगातार पुलिस कार्रवाई की जा रही है. देवास जिले में ही 10 किसानों के खिलाफ नरवाई जलाने पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया है. किसान भी चाहते हैं कि गेहूं की कटाई के बाद नरवाई के निष्पादन का विकल्प राज्य सरकार को निकालना चाहिए. किसान तो नरवाई नहीं जलाते लेकिन राज्य शासन ने इसके लिए किसानों को ही दोषी मान रखा है.”
सरकार को 15 मई की डेट लाइन
लक्ष्मी नारायण पटेल का आरोप है कि “सरकार किसानों की आय दुगनी से 8 गुना बढ़ाने की झूठी घोषणा कर रही है. सरकार की किसान विरोधी नीति के कारण 60% किसान डिफाल्टर हो चुका है. 0% ब्याज पर लोन के नाम पर अब किसानों पर सालाना 7% की दर से ब्याज वसूला जा रहा है, जबकि 1 अप्रैल से फिर ऐसे डिफाल्टर किसानों पर 14 प्रतिशत अर्थ दंड लगाया जाएगा. यदि 15 मई तक समर्थन मूल्य पर खरीदी और किसानों का ब्याज माफ नहीं किया गया तो किसान संघ तहसील स्तर पर घेराव करेगा.”
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