रूस की राजधानी मॉस्को इस समय भीषण ठंड और रिकॉर्डतोड़ बर्फबारी से जूझ रही है. बीते वीकेंड से शुरू हुई बर्फबारी ने शहर की रफ्तार थाम दी है. हालात ऐसे हैं कि सड़कों पर बर्फ की मोटी चादर बिछ गई है, फुटपाथ गायब हो चुके हैं और ट्रैफिक से लेकर पब्लिक ट्रांसपोर्ट तक बुरी तरह प्रभावित है.
रूसी मौसम विभाग के मुताबिक, 9 जनवरी को हुई बर्फबारी मॉस्को के 146 साल के मौसम रिकॉर्ड में सबसे भारी बर्फबारी में से एक है. हालात अभी पूरी तरह सामान्य होने से दूर हैं. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मॉस्को में 12 सेंटीमीटर तक और बर्फ गिर सकती है.
146 साल में टॉप-5 सबसे भारी बर्फबारी
रूस के हाइड्रोमेटेरोलॉजिकल सेंटर ने बताया कि 9 जनवरी की बर्फबारी मॉस्को के इतिहास की टॉप-5 सबसे भारी बर्फबारी में शामिल हो गई है. इतना ही नहीं, यह 21वीं सदी की टॉप-3 बर्फबारी में भी गिनी जा रही है. अकेले 9 जनवरी को 21.4 मिलीमीटर बर्फ और बारिश दर्ज की गई, जो 1976 के पुराने रिकॉर्ड (12.9 मिमी) से कहीं ज्यादा है.
शहर से हटाई गई 10 लाख क्यूबिक मीटर बर्फ
मॉस्को मेयर ऑफिस के मुताबिक, बीते दो दिनों में नगर सेवाओं ने करीब 10 लाख क्यूबिक मीटर बर्फ सड़कों से हटाई है. बर्फ पिघलाने वाले प्लांट्स में अब तक करीब 7.5 लाख क्यूबिक मीटर बर्फ भेजी जा चुकी है. अधिकारियों ने दिलचस्प तुलना करते हुए बताया कि अगर इतनी बर्फ को मालगाड़ियों के डिब्बों में भरा जाए, तो करीब 8,500 से ज्यादा गोंडोला वैगन लगेंगे, जो 109 किलोमीटर से भी लंबी ट्रेन बना देंगे.
क्यों हुई इतनी भारी बर्फबारी?
इस भारी बर्फबारी की वजह मेडिटरेनियन साइक्लोन बताया जा रहा है, जो 8 जनवरी की शाम मॉस्को और आसपास के इलाकों से टकराया. पहले दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी जिलों में बर्फ गिरी और फिर देखते ही देखते पूरा शहर इसकी चपेट में आ गया. साल की शुरुआत से अब तक मॉस्को में 35 मिमी से ज्यादा प्रिसिपिटेशन दर्ज हो चुका है, जो जनवरी के औसत से करीब 67% ज्यादा है. मॉस्को प्रशासन का कहना है कि हालात पर नजर रखी जा रही है.
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