Mohan Bhagwat Statement: ‘धर्म के रास्ते पर चलकर ही विश्व गुरु बनेगा भारत’, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बताया विकास का मूल मंत्र

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मुंबई के ‘विहार सेवक ऊर्जा मिलन’ को संबोधित करते हुए, RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि धर्म हम सभी के पीछे की प्रेरक शक्ति है. अगर हम धर्म द्वारा चलाई जा रही ‘गाड़ी’ में बैठेंगे, तो हमारा कभी ‘एक्सीडेंट’ नहीं होगा. धर्म पूरे ब्रह्मांड को चलाता है. कोई राज्य सेक्युलर हो सकता है, लेकिन कोई भी जीवित या निर्जीव प्राणी धर्म के बिना मौजूद नहीं रह सकता. पानी का भी अपना धर्म होता है वो है बहना. जब तक भारतवर्ष धर्म से निर्देशित रहेगा, वह विश्वगुरु बना रहेगा, क्योंकि दुनिया में इस आध्यात्मिक ज्ञान की कमी है.

RSS प्रमुख ने कहा कि हमारे संतों की गरिमा और सम्मान बनाए रखना हमारा कर्तव्य है. इसीलिए प्रधानमंत्री भी कहते हैं कि उन्हें उनसे ‘ना’ कहने में हिचकिचाहट होती है. हमें हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि हम भगवान का काम कर रहे हैं, लेकिन हम भगवान नहीं हैं.

‘भारत को उसकी परम ऊंचाइयों पर ले जाना है’

जाति व्यवस्था के मुद्दे पर बात करते हुए मोहन भागवत ने लोगों से इसे अपने मन से निकालने की अपील की. उन्होंने कहा कि इस भेदभाव को खत्म करने के लिए, मन से जाति को खत्म करना होगा. अगर यह ईमानदारी से किया जाए, तो 10 से 12 साल में जातिगत भेदभाव खत्म हो जाएगा. दर्शकों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि संघ का लक्ष्य समाज के साथ मिलकर भारत को उसकी परम ऊंचाइयों पर ले जाना है.

उन्होंने कहा कि संघ व्यक्ति के चरित्र निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के लिए काम करता है. यह किसी प्रतिक्रिया से बना संगठन नहीं है और न ही यह किसी के साथ प्रतिस्पर्धा में है. उन्होंने कहा कि संघ का लक्ष्य पूरे समाज के साथ मिलकर भारत को उसकी परम ऊंचाइयों पर ले जाना है. संघ खुद बड़ा नहीं बनना चाहता. वह समाज को बड़ा बनाना चाहता है. उन्होंने आगे कहा कि अगर लोग संघ को समझना चाहते हैं, तो उन्हें इसकी शाखाओं में आना चाहिए.

हम चौकीदारी करने वाले लोग हैं

मेरे पीछे कोई नहीं है. नरेंद्र मोदी, तुम्हारी ही ताकत है जो मुझे चलाती है. उस चलाने वाले का नाम धर्म है. उन्होंने कहा जब सृष्टि बनी, धर्म बना, जब तक धर्म भारत को चलाएगा, भारत विश्व गुरु बना रहेगा. देश के प्रधानमंत्री बोलते हैं, लेकिन संत ना कहने में हिचकिचाते हैं. हम चौकीदारी करने वाले लोग हैं हम धर्म ग्रुप की रक्षा करते हैं. अफजल खान शिवाजी महाराज से मिलने आया था. उसने लोगों पर ज़ुल्म किए, लेकिन महाराज शांत थे. उसके बाद जो हुआ. किस्मत अच्छे कर्मों को परखती है. धर्म कभी हारता नहीं. मैं संघ का काम कर रहा हूं, मैं भगवान की मर्ज़ी के लिए काम कर रहा हूं. आइए हम धर्म के लिए एक हों, उसी समय हमारा देश विश्व गुरु बनेगा.

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