धमतरी/बेमेतरा: स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली मितानिनों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदेशभर में मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को धमतरी और बेमेतरा जिला मुख्यालयों में हजारों की संख्या में मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्थ डेस्क फेसिलिटेटर और ब्लॉक कोऑर्डिनेटर सड़कों पर उतरीं। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और सरकार को चुनावी वादे याद दिलाए।
⚖️ चुनावी वादों को पूरा करने की गुहार
मितानिन संघ की पदाधिकारियों का कहना है कि 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान सरकार ने मितानिनों के मानदेय में 50 प्रतिशत वृद्धि और उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संविलियन करने का लिखित वादा किया था। सरकार बनने के लंबे समय बाद भी ये वादे पूरे नहीं हुए हैं, जिससे प्रदेश की हजारों महिला कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
📋 मितानिनों की 3 प्रमुख मांगें
आंदोलनकारी मितानिनों ने अपनी तीन सूत्रीय मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है:
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NHM में संविलियन: सभी कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत शामिल किया जाए।
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मानदेय में 50% वृद्धि: चुनावी घोषणा पत्र के अनुसार वेतन/क्षतिपूर्ति में तुरंत 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो।
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ठेका प्रथा पर रोक: स्वास्थ्य विभाग में जारी ठेका प्रथा को समाप्त किया जाए और किसी भी निजी एनजीओ के अधीन कार्य न करवाया जाए।
🚀 आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी
मितानिनों का कहना है कि वे कोरोना काल से लेकर आज तक फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में स्वास्थ्य योजनाओं को घर-घर तक पहुंचा रही हैं। सपना चौबे, प्रदेश प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा कि वे आर्थिक असुरक्षा से जूझ रही हैं। यदि सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा।
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