Manipur Violence: 6 नागा लोगों के शव मिलने से मणिपुर में फिर भड़की हिंसा; आक्रोशित भीड़ और पुलिस में टकराव

देश

इंफाल: मणिपुर में जातीय हिंसा की आग थमने का नाम नहीं ले रही है। करीब तीन साल से सुलग रहे इस राज्य में एक बार फिर नफरत ने छह परिवारों को उजाड़ दिया है। पिछले महीने 13 मई को लेइलोन वाइफेई गांव से अगवा किए गए 6 नागा पुरुषों के शव 28 दिन बाद बरामद हुए हैं, जिससे पूरे राज्य में तनाव और गहरा आक्रोश व्याप्त है।

🕯️ 28 दिन का इंतजार और दर्दनाक अंत

शवों के बरामद होने की खबर मिलते ही इंफाल के जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) के बाहर हजारों की संख्या में लोग जमा हो गए। 28 दिनों तक चले अनिश्चितता के दौर के बाद जब ये शव अस्पताल पहुंचे, तो वहां का सन्नाटा चीखों में बदल गया। लियांगमाई नागा परिषद के अध्यक्ष टिमोथी विजुनामेई ने कहा कि शवों की हालत देख समुदाय पूरी तरह टूट चुका है।

📢 आक्रोश और प्रशासनिक विफलता पर सवाल

अस्पताल के बाहर मौजूद भीड़ का गुस्सा सातवें आसमान पर था। आक्रोशित लोगों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। समुदाय के नेताओं ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं कि लापता लोगों को ढूंढने और शवों को वापस लाने में 28 दिन का लंबा समय क्यों लगा? परिजन अभी भी शवों की औपचारिक पहचान का इंतजार कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ये वही लोग हैं जिन्हें अगवा किया गया था।

🚔 सर्च ऑपरेशन और सरकार का रुख

मणिपुर पुलिस के अनुसार, करीब 450 जवानों, खोजी कुत्तों और फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीमों ने 24 घंटे के गहन सर्च ऑपरेशन के बाद इन शवों को खोजा। मामले की गंभीरता को देखते हुए नागालैंड और मेघालय के मुख्यमंत्रियों ने भी इस बर्बर घटना की कड़ी निंदा की है। फिलहाल पुलिस कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने में जुटी है।

🛑 यूनाइटेड नागा काउंसिल का 24 घंटे का बंद

इस अमानवीय घटना के विरोध में यूनाइटेड नागा काउंसिल ने 24 घंटे के राज्यव्यापी बंद का ऐलान किया है। सड़कों पर उतरकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लोग हिंसा के अंत और न्याय की मांग कर रहे हैं। राज्य में शांति की उम्मीदें फिर से धूमिल होती दिख रही हैं और एक बार फिर मणिपुर का भविष्य अनिश्चितता के अंधेरे में है।

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