Manipur Violence Update: मणिपुर के पहाड़ी जिलों में तनाव बरकरार, हिंसक झड़पों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 9 हुई

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मणिपुर के हिंसा प्रभावित पहाड़ी जिलों में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। हाल ही में दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़पों में मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 9 तक पहुंच गई है। बिगड़ते हालात को देखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने सभी नागरिकों से शांति और संयम बनाए रखने की कड़ी अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लाएं। मुख्यमंत्री ने नागरिकों की हत्या और इस तरह की अमानवीय हिंसा की कड़ी निंदा की है।

💥 कैसे भड़की हिंसा और कहां-कहां हुए हमले?

हिंसा की ये ताजा और दर्दनाक घटनाएं मुख्य रूप से राज्य के पहाड़ी जिलों कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी में शुक्रवार तथा शनिवार के दौरान हुईं।

  • चसाद गांव की घटना: शुक्रवार रात को नगा बहुल कामजोंग जिले के कुकी बहुल चसाद गांव में अज्ञात हमलावरों ने पांच बच्चों की मां की गोली मारकर हत्या कर दी। इस 22 वर्षीय महिला की हत्या के बाद कुकी और नगा सशस्त्र समूहों के बीच भारी गोलीबारी शुरू हो गई, जो शनिवार सुबह तक जारी रही। इस झड़प में 42 साल के एक व्यक्ति की मौत हो गई और लगभग 10 मकानों को आग के हवाले कर दिया गया।

  • कांगपोकपी और उखरुल में हमले: इसके बाद शनिवार को कांगपोकपी जिले के तापन और मकुई गांवों में संदिग्ध उग्रवादियों ने हमला किया, जिसमें नगा समुदाय के दो ग्राम रक्षकों समेत तीन लोगों की मौत हो गई। वहीं उखरुल जिले में भी चेपू याओलेन गांव के पास एक कार पर गोलीबारी की गई, जिसमें चालक संदीप राय की मौत हो गई।

👮‍♂️ प्रशासन और सुरक्षा बलों की तैनाती

बिगड़ती कानून-व्यवस्था को देखते हुए कामजोंग जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत कड़े प्रतिबंध (निषेधाज्ञा) लागू कर दिए हैं। सबसे अधिक संवेदनशील और प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को रोका जा सके।

मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि वे निर्दोष नागरिकों की हत्या और हिंसा की घोर निंदा करते हैं। उन्होंने सुरक्षा बलों को प्रभावी कदम उठाने के आदेश दिए हैं और सभी समुदायों से अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति, आपसी संवाद और सद्भाव को प्राथमिकता दें।

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