बेंगलुरु से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां इलाज के लिए जब पैसे कम पड़ गए तो एक पिता ने अपने ही मासूम बेटे को जहर दे दिया. यह घटना बागुलूर इलाके की है, जहां एक विशेष मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे दिव्यांग बच्चे की हालत अब गंभीर बनी हुई है.
बागुलूर निवासी मुनिकृष्णा और उसकी पत्नी सत्या का बेटा जोएल जन्म से ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित है. बच्चे को विशेष देखभाल और लगातार इलाज की जरूरत थी. अस्पतालों के चक्कर और इलाज पर हो रहा भारी खर्च परिवार के लिए असहनीय बनता जा रहा था. इन्हीं परिस्थितियों के चलते पिता मुनिकृष्णा मानसिक रूप से बुरी तरह टूट चुका था.
बच्चा वेंटिलेटर सपोर्ट पर है
यह दर्दनाक घटना 22 दिसंबर को घटी, लेकिन इसका खुलासा अब हुआ है. उस दिन अचानक बच्चे के मुंह से झाग निकलने लगा, जिसे देखकर मां सत्या और दादी के होश उड़ गए. उन्होंने बिना देर किए बच्चे को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां से उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे इंदिरा गांधी बाल अस्पताल रेफर कर दिया गया. फिलहाल बच्चा वेंटिलेटर सपोर्ट पर है और डॉक्टर उसकी हालत को बेहद नाजुक बता रहे हैं.
घटना के बाद मां सत्या ने पूरे मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई, जिसके आधार पर पिता मुनिकृष्णा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं की छानबीन की जा रही है. इस बीच, आरोपी पिता मुनिकृष्णा ने अपने अपराध को स्वीकार करते हुए जो बयान दिया, वह और भी झकझोर देने वाला है. टीवी9 से बात करते हुए उसने कहा कि उसके पास अपने दिव्यांग बेटे के इलाज के लिए पैसे नहीं बचे थे. उसने बताया कि इलाज के लिए उसने काफी कर्ज लिया, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हुआ.
बेटे के खाने में मिला दिया था जहर
मुनिकृष्णा का कहना है कि न तो किसी ने उसकी आर्थिक मदद की और न ही डॉक्टरों के पास कोई ठोस समाधान था, जिससे वह पूरी तरह हताश हो गया. पिता ने स्वीकार किया कि जब वह काम पर जाता था, तब वहां पौधों पर कीटनाशक का छिड़काव होता था. उसी दौरान उसने 50 मिलीलीटर कीटनाशक लिया और उसे अपने बेटे के खाने में मिला दिया. उसने कहा कि लगातार इलाज, कर्ज और बेबसी ने उसे इस खौफनाक कदम के लिए मजबूर कर दिया.
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