यह कहानी दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में लोगों की जान बचाने वाले जांबाज रियल हीरोज की है। इन्होंने दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी। मालवीय नगर का ‘फ्लरिश स्टे होटल’ आग की लपटों में घिरा हुआ था, चारों तरफ जहरीला धुआं फैला था और अंदर फंसे लोग मदद के लिए चीख-पुकार कर रहे थे। हालात इतने भयावह थे कि आसपास खड़े लोग भी डर से सहमे हुए थे, लेकिन इसी अफरा-तफरी के बीच कुछ बहादुर लोग आगे आए। उन्होंने अपनी सुरक्षा की रत्ती भर चिंता किए बिना धधकते होटल के भीतर घुसकर लोगों को बाहर निकाला, घायलों की मदद की और कई जिंदगियां बचाईं।
🔥 भीषण हादसे में 21 मौतें, लेकिन फरिश्ते न आते तो बढ़ सकता था आंकड़ा
इस भीषण हादसे में 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और कई लोग अब भी अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। मृतकों और घायलों का यह आंकड़ा और भी भयावह हो सकता था, अगर रियाजुद्दीन, आमिर, मोहम्मद वसीम और अफजल जैसे बहादुर लोग वक्त रहते मदद के लिए आगे न आते। आज कहानी इन्हीं रियल हीरोज की है, जिन्होंने आग की भीषण लपटों के सामने भी इंसानियत का हाथ नहीं छोड़ा।
🛏️ खिड़कियों से तड़पते लोगों को बचाने के लिए दुकान से निकालकर बिछा दिए दर्जनों गद्दे
हादसे के दौरान होटल के ठीक सामने गद्दों की दुकान चलाने वाले रियाजुद्दीन मंसूरी और उनके बेटे अरमान सबसे पहले मदद के लिए आगे आए। जब उन्होंने देखा कि कई लोग ऊपरी मंजिलों पर फंसे हुए हैं और खिड़कियों से हाथ हिलाकर मदद की गुहार लगा रहे हैं, तो उन्होंने बिना एक पल गंवाए अपनी दुकान से दर्जनों गद्दे और रजाइयां निकालकर होटल के बाहर सड़क पर बिछा दीं। गद्दों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर उन्होंने एक अस्थायी सुरक्षा कवच तैयार किया ताकि लोग ऊपर से कूदकर अपनी जान बचा सकें।
🇮🇳 “हिंदू-मुसलमान से ऊपर इंसानियत है, हम सब हिंदुस्तानी हैं” – रियाजुद्दीन
रियाजुद्दीन के बेटे अरमान के मुताबिक, लोगों की जान बचाने और उन्हें संभालने के दौरान उन्हें खुद भी कई चोटें आईं और उनकी दुकान का लगभग दो लाख रुपये का कीमती सामान पूरी तरह नष्ट हो गया। रियाजुद्दीन का कहना है कि किसी तड़पते हुए इंसान की जान बचाने के सामने यह माली नुकसान कोई मायने नहीं रखता। उनके शब्द थे, “हिंदू-मुसलमान से ऊपर इंसानियत होती है। हम सब हिंदुस्तानी हैं और मुसीबत में फंसे जरूरतमंदों की मदद करना हमारा फर्ज है।”
🌫️ मुंह पर कपड़ा बांधकर गर्म सीढ़ियों से अंदर घुसे स्थानीय युवा
स्थानीय युवक मोहम्मद अफजल बताते हैं कि होटल के अंदर के हालात बेहद भयावह थे। घने काले धुएं के कारण सांस लेना नामुमकिन हो रहा था, आंखों में तेज जलन थी और आग की तपन से सीढ़ियां तक गर्म हो चुकी थीं। कई लोग कमरों के बाहर कॉरिडोर में बेहोशी की हालत में पड़े मिले। ऐसे में स्थानीय युवाओं ने अपने मुंह पर गीला कपड़ा बांधा और एक-एक मंजिल पर जाकर फंसे लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। कई लोगों को पीठ और कंधों पर उठाकर नीचे लाया गया।
⏱️ ‘अंदर फंसे लोगों के पास समय नहीं था, हमें तुरंत एक्शन लेना था’
असरार खान बताते हैं, “जब हमने होटल से काला धुआं निकलते देखा तो हम समझ गए कि अंदर फंसे लोगों के पास ज्यादा समय नहीं है। ऊपर से लोग रोते हुए चिल्ला रहे थे। हम कुछ साथी तुरंत होटल के भीतर घुस गए। धुएं की वजह से दम घुट रहा था, लेकिन लोगों की जान बचाना ज्यादा जरूरी था।” वहीं वकार के मुताबिक, कुछ लोगों ने तो घबराहट में तीसरी और चौथी मंजिल से सीधे नीचे छलांग लगा दी, जिन्हें नीचे खड़े युवाओं ने गद्दों के सहारे संभाला।
🗣️ विदेशी नागरिकों को इशारों में समझाया और सुरक्षित बाहर निकाला
मोहम्मद अफजल ने आगे बताया, “जब हम अंदर पहुंचे तो चारों तरफ सिर्फ धुआं ही धुआं था और कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। कई कमरों के दरवाजे अंदर से बंद थे। हम लोगों को जोर-जबरदस्ती आवाज देकर बाहर निकलने का रास्ता बताते रहे। होटल में रुके कई विदेशी नागरिक हमारी भाषा नहीं समझ पा रहे थे, इसलिए हमने उन्हें इशारों से बाहर आने के लिए कहा और सुरक्षित निकाला।”
🫁 इमरजेंसी ट्रेनिंग आई काम, सीपीआर (CPR) देकर लौटाईं कई लोगों की सांसें
मोहम्मद शोएब खान कहते हैं, जब कुछ लोगों की सांसें रुकती हुई दिखाई दीं तो मैंने तुरंत उन्हें जमीन पर लेटाकर सीपीआर (CPR) देना शुरू किया। कई लोग पूरी तरह बेसुध थे। वहीं हादसे के समय मैक्स अस्पताल में कार्यरत वसीम राजा भी घटनास्थल पर पहुंचे। अस्पताल में मिलने वाली इमरजेंसी मेडिकल ट्रेनिंग का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने होटल के अंदर और बाहर कई गंभीर लोगों को सीपीआर दिया। वसीम ने बताया कि अस्पताल में आग जैसी आपात स्थिति में लोगों की जान बचाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, उसी के आधार पर उन्होंने घायलों की जान बचाई और उन्हें एंबुलेंस तक पहुंचाया।
🚪 बाथरूम का दरवाजा तोड़कर अंदर ली एंट्री, गद्दों पर कुदाया
मो. हनीश ने बताया कि वह पास के कमरे में सो रहे थे, तभी उनकी किराएदार ने आग के बारे में बताया। उन्होंने तुरंत खिड़कियां तोड़ीं और नीचे गद्दे बिछाए। वहीं तौसीफ खान ने बताया कि उनका घर होटल के ठीक पीछे था। वे मदद के लिए पीछे के रास्ते से गए और होटल के बाथरूम की खिड़की व दरवाजा तोड़कर अंदर एंट्री ली। वहां से उन्होंने लोगों को ऊपर से ही नीचे पड़े गद्दों पर कुदाकर सुरक्षित निकाला।
👮 दिल्ली पुलिस के 10 जवान भी रेस्क्यू ऑपरेशन में झुलसे, नहीं रोका अभियान
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले रेस्क्यू ऑपरेशन में दिल्ली पुलिस के जवानों ने भी असाधारण साहस का परिचय दिया। हादसे के दौरान आग की लपटों के बीच से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में जुटे दिल्ली पुलिस के 10 जवान खुद भी गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में हेड कॉन्स्टेबल करतार, हरज्ञान, प्रेम चंद, जितेंद्र और दिनेश के साथ-साथ कॉन्स्टेबल रविरंजन, संदीप, विक्रम, दीपक और रामपाल शामिल हैं। आग की लपटों से झुलसने के बावजूद इन जांबाज पुलिसकर्मियों ने अपना रेस्क्यू अभियान तब तक नहीं रोका जब तक आखिरी इंसान को बाहर नहीं निकाल लिया गया।
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