मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान: कोरिया जिले में घर-घर जांच, छात्रावासों में मच्छरदानी अनिवार्य; कलेक्टर ने दिए कड़े निर्देश

छत्तीसगढ़

कोरिया (छत्तीसगढ़): कोरिया जिले में मलेरिया की प्रभावी रोकथाम, त्वरित जांच, सुचारू उपचार और निरंतर निगरानी को लेकर जिला कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।

कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जनस्वास्थ्य से जुड़े इस संवेदनशील कार्य में किसी भी स्तर पर जरा सी भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

🦟 ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ का 14वां चरण जारी, संवेदनशील इलाकों में घर-घर हो रही स्क्रीनिंग

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के 10 सर्वाधिक मलेरिया प्रभावित जिलों में 15 जून से ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ का 14वां चरण पूरी सक्रियता के साथ संचालित किया जा रहा है।

इस अभियान के तहत जिले के अत्यधिक संवेदनशील और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमों द्वारा घर-घर जाकर मलेरिया की जांच और स्क्रीनिंग की जा रही है। मानसून के आगमन के साथ ही जलभराव और मच्छरों के पनपने से संक्रमण बढ़ने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य अमले को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

🩺 लगातार मॉनिटरिंग के निर्देश, तेज बुखार से होने वाली हर मौत का होगा अनिवार्य सत्यापन

कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने निर्देशित किया है कि मलेरिया प्रभावित और संवेदनशील गांवों में स्वास्थ्य दल लगातार भ्रमण कर स्थिति पर पैनी नजर रखें।

प्रत्येक संभावित मरीज की तत्काल जांच कर बिना किसी विलंब के इलाज शुरू किया जाए। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को बिना देरी किए उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जाए, ताकि समय पर समुचित उपचार मिल सके और जनहानि को रोका जा सके।

कलेक्टर ने तेज बुखार से होने वाली हर दुखद मृत्यु की अनिवार्य सूचना देने और उसका विस्तृत सत्यापन (Verification) करने के भी कड़े निर्देश दिए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) द्वारा मलेरिया स्क्रीनिंग और एक्टिव केसों का रिकॉर्ड तैयार कर प्रभावित क्षेत्रों की सतत निगरानी की जाएगी।

🛖 छात्रावासों व आश्रमों में मच्छरदानी अनिवार्य, प्रभावित इलाकों में होगा इनडोर रेजिडुअल स्प्रे (IRS)

कलेक्टर ने कहा कि मलेरिया से बचाव हेतु लॉन्ग लास्टिंग इंसेक्टिसाइडल नेट (LLIN – विशेष मच्छरदानियों) का उपयोग हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।

विशेष रूप से बालक-बालिका छात्रावासों, आश्रम शालाओं और अन्य आवासीय संस्थानों में इसका कड़ाई से पालन कराया जाए। इसके अतिरिक्त, चिह्नित मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में समय-सीमा के भीतर इनडोर रेजिडुअल स्प्रे (IRS) का छिड़काव भी पूर्ण कराया जाए।

जिला प्रशासन ने अभियान की नियमित समीक्षा करने के निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को ताकीद की गई है कि जहां भी संक्रमण का खतरा अधिक दिखाई दे, वहां तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।

📋 कोरिया कलेक्टर के 6 बड़े और महत्वपूर्ण निर्देश

  1. सघन निगरानी: मलेरिया प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीमों की नियमित उपस्थिति, निगरानी और जांच।

  2. त्वरित इलाज: प्राथमिक जांच के तुरंत बाद मरीज का उपचार शुरू किया जाए।

  3. ससमय रेफरल: गंभीर स्थिति वाले मरीजों को बिना किसी विलंब के उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जाए।

  4. मृत्यु सत्यापन: तेज बुखार से होने वाली प्रत्येक मौत की अनिवार्य सूचना और प्रशासनिक सत्यापन।

  5. मच्छरदानी अनिवार्य: छात्रावासों, आश्रमों और आवासीय परिसरों में मच्छरदानी का कड़ाई से उपयोग।

  6. कीटनाशक छिड़काव: प्रभावित क्षेत्रों में समयबद्ध तरीके से इनडोर रेजिडुअल स्प्रे (IRS) कराया जाए।

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