पाकुड़ में ‘मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना’ की लाभार्थी महिलाएं इन दिनों भारी परेशान हैं। योजना की राशि पिछले दो महीने से उनके बैंक खातों में नहीं पहुंची है, जिसके कारण महिलाओं में प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश है। लाभुक महिलाएं अपने दस्तावेजों के सत्यापन और भुगतान की जानकारी के लिए लगातार अंचल और सामाजिक सुरक्षा कार्यालय के चक्कर काट रही हैं।
📄 सत्यापन के नाम पर ‘टालमटोल’
महिलाओं का आरोप है कि उन्हें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजा जा रहा है। कहीं ‘जनगणना कार्य’ में व्यस्त होने का बहाना बनाकर लौटा दिया जाता है, तो कहीं स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। लाभार्थियों का कहना है कि उन्हें डर है कि यदि समय रहते कागजात वेरिफाई नहीं हुए, तो उन्हें इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ मिलना बंद हो जाएगा।
💰 क्या है प्रशासन का पक्ष?
इस मामले पर जब सामाजिक सुरक्षा कोषांग की निदेशक कांति रश्मि से संपर्क किया गया, तो उन्होंने आधिकारिक बयान देने से मना कर दिया। हालांकि, विभागीय सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने जिले के 1 लाख 55 हजार लाभार्थियों के लिए दो महीने की राशि उपलब्ध करा दी है। सत्यापन की प्रक्रिया अगले 8 से 10 दिनों में पूरी कर ली जाएगी, जिसके तुरंत बाद राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।
🛠️ समस्या का जल्द होगा समाधान
प्रशासन का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में अंचल कार्यालय के कर्मी सत्यापन का काम कर रहे हैं। महिलाओं को जो भी तकनीकी समस्या हो रही है, उसकी समीक्षा की जाएगी और इस प्रक्रिया में हो रही देरी को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे ताकि उन्हें और अधिक परेशान न होना पड़े।
संपादकीय टिप्पणी: सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुँचना आवश्यक है। क्या आपको लगता है कि इस तरह के सत्यापन कार्यों के लिए ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ (एकल खिड़की) या ऑनलाइन पोर्टल को और अधिक पारदर्शी बनाना चाहिए ताकि महिलाओं को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें? अपने विचार नीचे साझा करें।
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