लुधियाना: उत्तर भारत के सबसे अहम और व्यस्त रेलवे जंक्शनों में शुमार लुधियाना रेलवे स्टेशन पर चल रहे आधुनिकीकरण (री-डेवलपमेंट) प्रोजेक्ट की बेहद धीमी रफ्तार ने रोजाना सफर करने वाले यात्रियों का जीना मुहाल कर दिया है। नवनिर्माण का यह कार्य अपनी निर्धारित समय-सीमा से लगभग 22 महीने पिछड़ चुका है। इस प्रशासनिक लेटलतीफी के बीच सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि पिछले एक साल से प्लेटफॉर्म नंबर 2, 3, 4, 5, 6 और 7 पर आम यात्रियों के इस्तेमाल के लिए शौचालय (टॉयलेट) की कोई भी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। इसके कारण यहां से रोजाना सफर करने वाले करीब 50 हजार यात्रियों, विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को भारी फजीहत और बेइज्जती का सामना करना पड़ रहा है।
अगस्त 2025 थी पहली डेडलाइन, अब जून 2027 तक खिंच गया प्रोजेक्ट
स्टेशन के कायाकल्प का कार्य जिस सुस्त गति से चल रहा है, उससे इस परियोजना की लागत और तय समय दोनों लगातार बढ़ते जा रहे हैं। शुरुआत में इस री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को पूरा करने की अंतिम समय-सीमा अगस्त 2025 तय की गई थी। इसके बाद रेलवे ने इस डेडलाइन को बढ़ाकर दिसंबर 2026 किया, लेकिन धरातल पर काम की मौजूदा स्थिति को देखते हुए खुद रेलवे अधिकारियों का यह मानना है कि यह प्रोजेक्ट जून 2027 से पहले पूरा होना बिल्कुल असंभव है।
रोजाना 200 ट्रेनों की आवाजाही, टॉयलेट के लिए प्लेटफॉर्म-1 की लंबी दौड़ और ट्रेन छूटने का डर
लुधियाना रेलवे स्टेशन से हर रोज लगभग 200 ट्रेनों का संचालन होता है और सामान्य दिनों में यहां 45 से 50 हजार यात्री आवागमन करते हैं। वहीं, त्योहारों के सीजन में यह संख्या बढ़कर 60 से 70 हजार तक पहुंच जाती है। प्लेटफॉर्म नंबर 2 से लेकर 7 तक टॉयलेट की सुविधा न होने के कारण यात्रियों को मजबूरन दौड़कर प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर जाना पड़ता है। कई बार प्लेटफॉर्म बदलने और भारी सामान के साथ फुटओवर ब्रिज पर चढ़ने-उतरने के चक्कर में यात्रियों की गाड़ियां तक छूट जाती हैं। प्लेटफॉर्म पर मौजूद दुकानदारों और वेंडर्स का भी यही कहना है कि जब यात्री टॉयलेट के बारे में पूछते हैं, तो उन्हें ट्रेन के डिब्बे के अंदर बने टॉयलेट का उपयोग करने या फिर लंबी दूरी तय कर प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर जाने की सलाह देनी पड़ती है।
दिव्यांग शौचालयों में गंदगी का अंबार और रैंप बनाना भूल गया विभाग
स्टेशन के विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर दिव्यांग यात्रियों के लिए जो विशेष टॉयलेट बनाए गए थे, वे भी आज बदहाली के आंसू रो रहे हैं। नियमित साफ-सफाई के अभाव में इन शौचालयों से भीषण बदबू आती है। हद तो तब हो जाती है जब यह पता चलता है कि रेलवे प्रशासन इन शौचालयों तक पहुंचने के लिए रैंप (ঢाल) बनाना ही भूल गया। रैंप के अभाव में व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाले दिव्यांगजन चाहकर भी इन शौचालयों तक नहीं पहुंच पाते। यात्री राजेश और मनोज ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि स्टेशन पर बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पूरे परिवार को असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ती है।
रेलवे अधिकारियों का पक्ष: त्योहारी सीजन के मद्देनजर किए जाएंगे अस्थायी प्रबंध
इस पूरे मामले को लेकर जब फिरोजपुर डिवीजन के वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों से बात की गई, तो उनका कहना था कि दिवाली के बाद प्लेटफॉर्म 2 और 3 पर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा और उसी दौरान नए टॉयलेट्स का निर्माण भी कराया जाएगा। इसके पश्चात चरणबद्ध तरीके से अन्य प्लेटफॉर्मों पर भी काम आगे बढ़ेगा। फिरोजपुर रेलवे डिवीजन के पी.आर.ओ. विक्रांत ने बताया कि “फेस्टिवल सीजन को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए स्टेशन पर टॉयलेट की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। पिछले साल भी अस्थायी प्रबंध किए गए थे। चूंकि अभी निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है, इसलिए कार्य पूरा होते ही यात्रियों को सभी आधुनिक सुविधाएं सुलभ होने लगेंगी।”
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