Ludhiana News: खाद्यान्न गबन और भ्रष्टाचार मामले में 14 साल बाद कोर्ट का फैसला

पंजाब

लुधियाना: लुधियाना में बहुचर्चित खाद्यान्न गबन एवं भ्रष्टाचार मामले में आज एक महत्वपूर्ण और सख्त फैसला सुनाते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमरिंदर सिंह शेरगिल की अदालत ने 17 आरोपियों को दोषी करार दिया, जबकि पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण 6 आरोपियों को बरी कर दिया। दोषी ठहराए गए आरोपियों में अधिकांश राशन डिपो धारक और आटा मिल मालिक शामिल हैं, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़े हुए थे।

अदालत ने सुभाष चंद उर्फ सुभाष चंद्र, आशुतोष गोयल, प्रिंस सोनी, राजिंदर कुमार, प्रदीप कुमार, नरेश कुमार, जावेद अली, परगट सिंह, शक्ति कुमार, परवीन कुमार, हरदीप कुमार, जतिंद्र कुमार और ललित अग्रवाल को 5-5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। वहीं कुलवीर सिंह उर्फ कुलबीर सिंह, ओम प्रकाश, चंद्र कांता और लक्ष्मी गोसाईं को 4-4 वर्ष के कारावास से दंडित किया गया। अदालत ने सभी दोषियों पर आर्थिक दंड (जुर्माना) भी लगाया है, हालांकि जुर्माने की राशि अलग-अलग निर्धारित की गई है।

अदालत की सख्त टिप्पणी

सजा पर बहस (क्वांटम ऑफ सेंटेंस) सुनने के बाद अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह सफल रहा है। अदालत ने टिप्पणी की कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में इस प्रकार का भ्रष्टाचार न केवल सरकारी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि गरीब और जरूरतमंद वर्ग के अधिकारों का भी हनन करता है।

दोषियों को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, धोखाधड़ी तथा भ्रष्टाचार से संबंधित अपराधों का दोषी पाया गया।

2012 में दर्ज हुआ था मामला

जिला अटॉर्नी दिनेश वर्मा ने बताया कि यह मामला 1 सितंबर 2012 को विजिलेंस ब्यूरो थाना, लुधियाना में दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार, माछीवाड़ा स्थित सरकारी गोदाम से 370 बोरी खाद्यान्न से लदे चार ट्रक राशन डिपो धारकों को वितरण के लिए भेजे गए थे। संबंधित डिपो धारकों द्वारा इस खाद्यान्न का अग्रिम भुगतान भी किया जा चुका था।

लेकिन योजना के तहत इन ट्रकों को निर्धारित स्थान तक पहुंचाने के बजाय रास्ते में ही मोड़कर आटा मिलों की ओर ले जाया गया। वहां इस खाद्यान्न को खुले बाजार में बेचने की साजिश रची गई, जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ और आम जनता खाद्यान्न से वंचित रह गई।

मिलीभगत से हुआ गबन

जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि इस पूरे गबन में राशन डिपो धारकों, आटा मिल मालिकों और कुछ सरकारी अधिकारियों की आपसी मिलीभगत थी। यह संगठित तरीके से किया गया आर्थिक अपराध था, जिसमें सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया गया।

मुकदमे के दौरान घटनाक्रम

मुकदमे की सुनवाई के दौरान पंग्रेन (PUNGRAIN) के एक इंस्पेक्टर सहित चार आरोपियों की मृत्यु हो जाने के कारण उनके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई। इसके अतिरिक्त एक महिला डिपो धारक को बार-बार समन के बावजूद अदालत में पेश न होने पर भगोड़ा घोषित किया गया।

जनहित से जुड़ा मामला

यह मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है और इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रकरण के रूप में देखा जा रहा है। अदालत के इस फैसले को सरकारी अनाज के दुरुपयोग के खिलाफ सख्त संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

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