मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के बीच एलपीजी गैस की कमी का असर अब शहर के पुराने और मशहूर होटलों पर भी दिखाई देने लगा है. मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के बाहर फोर्ट इलाके में स्थित करीब 178 साल पुराना पंचम पुरीवाला होटल भी इस संकट से जूझ रहा है. ब्रिटिश काल में 1848 में शुरू हुए इस ऐतिहासिक होटल में आमतौर पर 79 तरह के मेनू आइटम मिलते थे.
बताया जाता है कि खासतौर पर यहां 5 प्रकार की पूरियां परोसी जाती थीं. लेकिन एलपीजी की कमी के चलते अब होटल में सिर्फ दो ही आइटम परेासे जा रहे हैं. जिनमें पूरी-भाजी और आमरस-पूरी उपलब्ध है. होटल प्रबंधन के मुताबिक, उनके पास एलपीजी का बहुत ही सीमित स्टॉक बचा है. इसी कारण उन्हें कई परिचितों से उधार सिलेंडर लेकर किसी तरह होटल चलाना पड़ रहा है. इस स्थिति को लेकर टीवी9 भारतवर्ष के संवाददाता विनोद जगदाले ने पंचम पुरीवाला पहुंचकर मौके का जायजा लिया. इस दौरान होटल प्रबंधन ने बताया कि गैस सिलेंडर की कमी के कारण अब सिर्फ दो ही आइटम परेासे जा रहे हैं. आइटम कम होने से उनकी रोजाना आमदनी काफी कम हो गई है.
छठी पीढ़ी चला रही रेस्टोरेंट
होटल प्रबंधन ने बताया कि भारत में रेलवे शुरू होने से पहले से लेकर के अभी तक चालू है. इस दुकान का नाम पंचम पूरिवाला है. यह दुकान पंचम दास द्वारा खोली गई थी. यह दुकान मुंबई में सुबह-सुबह मजदूरों को भोजन कराने के लिए खोला गया था. इसके ठीक सामने अंग्रेजो के जमाने में एक जेल हुआ करता था, इस कारण यहां बहुत भीड़ रहता थी. अब एक दो मंजिला रेस्तरां में तब्दील हो गया है. इसे अब इस रेस्टोरेंट को मलिक की छठी पीढ़ी चला रही है.
महात्मा गांधी भी खा चुके हैं खाना
यह दुकान पूरी भाजी की है. पूरी-भाजी की एक प्लेट के साथ पांच पूरी और एक सब्जी परोसी जाती है, जो की यहां की परंपरा है. जिन्होंने इसे खोला उनका नाम पंचम था जिसका संस्कृत में अर्थ है पांच. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और सरदार वल्लभ भाई से लेकर दिग्गज सुपरस्टार राजेश खन्ना और संगीत निर्देशक खय्याम तक इस साधारण भोजनालय में खाना खा चुके है. इनके मेन्यू में बदलाव कर के पांच फ्लेवर की पूरी जोड़ दिया गया है. जो लोग मुंबई के खाने के बारे में जानते हैं, वो इस भोजनालय के बारे में भी जानते हैं. मुंबई के लोगों के बीच यह जगह बहुत फेमस है.
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