छतरपुर का ‘अयोध्या’: अवध कुंड धाम में ठहरे थे प्रभु श्रीराम, त्रेतायुग से जुड़ा है इस कुंड का गहरा रहस्य; दर्शन मात्र से कटते हैं कष्ट

मध्य प्रदेश

छतरपुर: बुंदेलखंड का छतरपुर जिला हमेशा अपनी कला, सांकृतिक, इतिहास और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है. चाहे खजुराहो के मंदिर हो या फिर बागेश्वर धाम का धार्मिक स्थल हो. वहीं छतरपुर का रहस्य त्रेतायुग से भी जुड़ा हुआ बताया जाता है. ऐसा माना जाता है कि यहां बने अवध कुंड धाम पर भगवान श्रीराम का आगमन हुआ था. इस पहाड़ की परिक्रमा करने से चित्रकूट जैसा फल मिलता है.

चंदला इलाके में मिलते हैं त्रेतायुग के प्रमाण

छतरपुर से 80 किलोमीटर दूर बसे चंदला इलाके में आज भी त्रेतायुग के जुड़े हुए प्रमाण मिलते हैं. चंदला तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत रावपुर की सीमा में एक विशाल पर्वत के सिखर पर अवधकुंड धाम स्थित है. जिसका नाता त्रेतायुग से है. वनवास के दौरान भगवान श्रीराम चंदला इलाके में बने प्राचीन अवध कुंड धाम पर एक दिन के लिए आए थे और यही पर रात गुजारी थी. यह जंगली इलाका है और पहाड़ पर एक विशाल कुंड भी बना हुआ है. ऐसा कहा जाता है कि इसका पानी ना कभी सूखता है, ना घर में रखने पर खराब होता है.

भगवान राम ने की थी अवधकुंड की उत्पत्ति

पहाड़ पर हजारों वर्ष पुराने राम-जानकी मंदिर के साथ चरण पादुका मंदिर, शंकर भगवान मंदिर आज भी मौजूद है. इस स्थान पर पूरे साल भक्तों का आना लगा रहता है. पंडित सौरभ तिवारी बताते हैं “आनंद रामायण ग्रंथ अनुसार त्रेतायुग में वन जाते समय भगवान राम जानकी ने पर्वत के सिखर पर अवधकुंड की उत्पत्ति की थी और सन्यासन अवधिया दाई यानी बुजुर्ग महिला को वनवास के बाद लौट कर मिलने को कहा था. तब से यह पहाड़ी अवधकुंड के नाम से जानी जाने लगी.

अवधकुंड का जल माना जाता है खास

इस पर्वत की साढ़े 4 कोष की परिक्रमा लगाने से चित्रकूट धाम की परिक्रमा लगाने के बराबर धर्म लाभ मिलता है, क्योंकि भगवान राम यहां रुके थे. अवधकुंड का शीतल जल गंगा जल के जैसा है. यह जल कई दिनों तक बोतल में रखने के बाद भी स्वच्छ ही रहता है. इस जल के पीने से रोग दूर होते हैं. इस कुंड के दर्शन करने के लिए महोबा, बांदा, लखनऊ, टीकमगढ़, पन्ना, सागर, छतरपुर, झांसी, ग्वालियर सहित दूर-दूर से भक्त आते हैं.

जल ग्रहण कर बोतल में भरकर घर ले जाते हैं और पूजा के स्थान पर रखते हैं. यहां पहुंचने के लिए चंदला बाईपास से एक किलोमीटर कच्चा रास्ता फिर सीधी पहाड़ी पैदल चढ़ाई 600 मीटर व चंदला रावपुर मार्ग से 2 किलोमीटर कच्चा रास्ता होते हुए अवधकुण्ड पहाड़ पर पहुंचते हैं.”

स्थानीय पूर्व पार्षद व महिला श्रद्धालु अंजू सोनी ने बताया कि इस मंदिर का जीर्णोद्धार होना चाहिए. रोड बनना चाहिए, यह बहुत ही प्राचीन मंदिर है. भक्तों की आस्था जुड़ी हुई है.

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