Lohardaga Sadar Hospital News: सदर अस्पताल में बिचौलियों का राज; सिजेरियन के नाम पर मरीजों को किया जा रहा प्राइवेट रेफर

झारखण्ड

लोहरदगा: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लोहरदगा सदर अस्पताल में मरीजों की जान-माल के साथ खिलवाड़ करने वाला बिचौलियों का एक बड़ा मायाजाल सक्रिय है। स्थिति यह है कि मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों के एजेंट सदर अस्पताल से ही बहला-फुसलाकर बाहर ले जाते हैं, जहाँ मेडिकल प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाई जाती हैं।

🩺 संसाधनों की कमी या बिचौलियों का खेल?

सदर अस्पताल में 11 में से 5 चिकित्सा पदाधिकारी कार्यरत हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञों (Gynecologists), शिशु रोग विशेषज्ञों और निश्चेतक (Anesthetists) की नियुक्ति के बावजूद सिजेरियन मामलों में मरीजों को रेफर कर देना एक बड़ा रहस्य बना हुआ है। सवाल यह है कि जब अस्पताल में सभी विशेषज्ञ मौजूद हैं, तो फिर प्रसव के मामलों में अस्पताल प्रशासन मरीजों को बाहर क्यों भेजता है?

📊 मई 2026 के आंकड़े खोल रहे पोल

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो केवल मई 2026 में सदर प्रखंड की 18 गर्भवती महिलाओं का प्रसव सरकारी के बजाय निजी अस्पतालों में हुआ है। यदि यह आंकड़ा एक महीने का है, तो पूरे साल का हिसाब कितना भयावह होगा? यह स्पष्ट है कि सरकारी अस्पताल की नाक के नीचे एक समानांतर व्यवस्था काम कर रही है, जहाँ गरीबों को मजबूरन प्राइवेट इलाज के लिए धकेला जा रहा है।

⚖️ जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका

हाल ही में एक गर्भवती महिला को स्कूटी पर रेफर करने के मामले ने पूरे सिस्टम को हिला कर रख दिया है। स्वास्थ्य विभाग जांच की बात तो कर रहा है, लेकिन बिचौलियों के गठजोड़ को तोड़ने में अब तक नाकाम रहा है। क्या मुख्यमंत्री की समीक्षा और स्वास्थ्य विभाग की जांच केवल कागजों तक सीमित रहेगी, या लोहरदगा के लोगों को सरकारी अस्पताल में बेहतर चिकित्सा का अधिकार मिल पाएगा?

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