पुणे: लोहगढ़ में हुई मंगेतर की हत्या के मामले ने अब राज्य विधानसभा में तूल पकड़ लिया है। एनसीपी (NCP) विधायक सुनील शेलके ने सदन में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच और फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्यवाहक अध्यक्ष राजू खरे ने सरकार को इस पूरे प्रकरण के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है।
🕵️ दुर्घटना का सच: पुलिस जांच में खुला हत्या का राज
विधायक सुनील शेलके ने बताया कि शुरुआत में पीड़ित परिवार को केतन अग्रवाल की मौत को एक ‘दुर्घटना’ बताया गया था, लेकिन पुणे ग्रामीण पुलिस की विस्तृत और गहन जांच ने इस झूठ का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने जब सबूतों को खंगाला और गवाहों के बयान दर्ज किए, तो यह स्पष्ट हो गया कि यह एक सोची-समझी हत्या थी। शेलके ने पुणे ग्रामीण एसपी और जांच टीम की कार्यक्षमता की सराहना की।
💔 आरोपी का कथित प्रेम संबंध और साजिश
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों का हवाला देते हुए विधायक ने दावा किया कि आरोपी सिया गोयल और उसके प्रेमी के बीच फोन कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जो हत्याकांड के पीछे के मकसद को साफ करते हैं। विधायक का आरोप है कि गोयल परिवार ने अग्रवाल परिवार से सिया के अन्य संबंधों की जानकारी पूरी तरह छिपाकर रखी थी। इसी के चलते उन्होंने मांग की है कि गोयल परिवार के उन सदस्यों की भी जांच हो जो इस साजिश में शामिल हो सकते हैं।
🏛️ विधानसभा में प्रक्रियात्मक बहस
विधानसभा में SIT गठन को लेकर कुछ तकनीकी बहस भी हुई। जहां विपक्षी दल शिवसेना (UBT) के भास्कर जाधव ने पीठासीन अधिकारी के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए, वहीं बीजेपी के सुधीर मुनगंटीवार ने स्पष्ट किया कि विधान परिषद और विधानसभा के नियमों में अंतर है। हालांकि, अंततः केतन अग्रवाल के परिवार को न्याय दिलाने के लिए मामले की गंभीरता को स्वीकार किया गया।
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