Legal Luminary Mourned: न्यायमूर्ति महावीर सिंह सिंधु का निधन; न्यायिक जगत ने अश्रुपूर्ण आंखों से दी श्रद्धांजलि

हरियाणा

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति महावीर सिंह सिंधु का रविवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 58 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से न्यायिक, प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार को उनके पैतृक गांव मसूदपुर में उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनके पुत्र समृद्ध सिंह सिंधु ने मुखाग्नि दी।

⚖️ न्यायिक जगत के दिग्गज को भावपूर्ण श्रद्धांजलि

न्यायमूर्ति सिंधु की अंतिम यात्रा में न्यायपालिका के वरिष्ठ अधिकारियों सहित देश और प्रदेश के अनेक गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। इस दौरान पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री अश्विनी कुमार मिश्रा, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री जी.एस. संधावालिया और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

🚜 साधारण किसान परिवार से न्यायपालिका के शिखर तक

4 अप्रैल 1967 को एक साधारण कृषक परिवार में जन्मे न्यायमूर्ति सिंधु का जीवन संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। गांव के राजकीय विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने 1992 में एलएलबी पूरी की। वे अपने परिवार के पहले सदस्य थे जिन्होंने वकालत का पेशा अपनाया। अपनी मेहनत के दम पर वे पहले एक सफल अधिवक्ता बने और बाद में 2017 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए।

💼 संवैधानिक पदों पर उल्लेखनीय सेवाएं

अपने लंबे न्यायिक करियर में उन्होंने हरियाणा लोक सेवा आयोग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और रेड क्रॉस सोसायटी जैसे अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों का प्रतिनिधित्व किया। 3 दिसंबर 2018 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। अपनी गहन कानूनी समझ और निष्पक्ष फैसलों के कारण वे हमेशा न्याय के प्रति समर्पित रहे।

🌳 जड़ों से जुड़े व्यक्तित्व के धनी

न्यायमूर्ति सिंधु की सादगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे उच्च पद पर रहने के बावजूद अपने गांव और समाज से गहराई से जुड़े रहे। वे अक्सर अपने पैतृक गांव के विद्यालय में सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत रहते थे। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सादगी और विनम्रता ही एक व्यक्ति की असली पहचान है। उनका जाना न्यायपालिका और हरियाणा के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

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