कुरुक्षेत्र: एलएनजेपी सिविल अस्पताल में उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब नर्सिंग ऑफिसर्स ने राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सोमवार को नर्सिंग स्टाफ ने दो घंटे का ‘पेन डाउन’ प्रदर्शन किया और रेणु भाटिया की टिप्पणियों को पूरे नर्सिंग कैडर की गरिमा के खिलाफ बताते हुए उनसे सार्वजनिक माफी की मांग की।
👩⚕️ विवाद की जड़: निरीक्षण के दौरान की गई टिप्पणी
विवाद की शुरुआत रविवार को हुई, जब रेणु भाटिया एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के मामले की जांच के लिए अस्पताल पहुंची थीं। वहां उन्होंने नर्सिंग स्टाफ से तीखे सवाल किए। चेयरपर्सन ने एक नर्स से पूछा था कि, “यदि तुम्हारी अपनी बेटी होती तो क्या उसे 15 मिनट तक पुरुष डॉक्टर के पास अकेला छोड़तीं?” इसी टिप्पणी से आहत होकर स्टाफ ने इसे अपना अपमान माना है।
⚖️ नर्सों का तर्क: हर गलती का ठीकरा हम पर क्यों?
प्रदर्शनकारी नर्सिंग ऑफिसर्स का कहना है कि वे दिन-रात मरीजों की सेवा करते हैं, लेकिन अस्पताल में कोई भी गड़बड़ी होने पर सीधे नर्सिंग स्टाफ को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। सीनियर नर्सिंग ऑफिसर गुरमीत कौर ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि एक-एक नर्स पर 70 से 80 मरीजों की जिम्मेदारी होती है, फिर भी उनके समर्पण को नजरअंदाज किया जा रहा है। स्टाफ ने सिविल सर्जन को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि माफी नहीं मांगी गई, तो आंदोलन पूरे हरियाणा में फैलाया जाएगा।
🔍 क्या है पूरा मामला (पॉक्सो एक्ट से जुड़ा प्रकरण)
यह मामला 29 मई का है, जब 15 वर्षीय किशोरी अपने भर्ती पिता के साथ अस्पताल आई थी। आरोप है कि इसी दौरान आरोपी डॉक्टर ने उसे ओपीडी में ले जाकर दुष्कर्म किया। मामले के तूल पकड़ने के बाद आरोपी डॉक्टर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और स्वास्थ्य विभाग ने उसकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं। चेयरपर्सन रेणु भाटिया का कहना है कि वे अपने बयान पर कायम हैं और मामले में लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय करना उनका कर्तव्य है।
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