Korba Durga Puja 2026: ऊर्जाधानी कोरबा में दुर्गा उत्सव की धूम, बांस शिल्प और छतरी थीम वाले पंडाल बने मुख्य आकर्षण

छत्तीसगढ़

कोरबा: देश और प्रदेश के साथ-साथ ऊर्जाधानी कहे जाने वाले कोरबा जिले में भी इन दिनों शारदीय नवरात्रि के अवसर पर दुर्गा उत्सव की जबरदस्त धूम देखने को मिल रही है। शहर की अलग-अलग दुर्गा उत्सव समितियों ने इस बार बेहद भव्य और आकर्षक पंडालों का निर्माण किया है। कहीं कोलकाता के प्रसिद्ध कारीगरों ने अपनी कला से पंडाल को अद्भुत आकार दिया है, तो कहीं स्थानीय कलाकारों ने अपनी बेहतरीन रचनात्मकता से लोगों का मन मोह लिया है।

🎋 जेपी नगर में बांस शिल्प का अनूठा पंडाल और शिवाजी नगर में छतरी की थीम

जेपी नगर कॉलोनी में बांस से तैयार किया गया एक बेहद खास और भव्य दुर्गा पंडाल कोलकाता के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार किया गया है, जो यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। इसके अलावा, एमपी नगर में भी एक से बढ़कर एक आकर्षक पंडाल बनाए गए हैं। शहर के शिवाजी नगर में इस बार ‘छतरी की थीम’ पर दुर्गा पंडाल को सजाया गया है। रास्ते भर छतरियों का उपयोग करके इस पूरे इलाके को एक अनोखे और मनमोहक अंदाज में सजाया गया है। विशेष तौर पर शाम के समय यहाँ की रंग-बिरंगी रोशनी और सजावट का नजारा बेहद खूबसूरत दिखाई देता है, जो शहरवासियों को अपनी ओर खींच रहा है।

🛕 काशी की तर्ज पर कोसाबाड़ी में होती है विशेष पूजा और सबसे बड़ा गरबा

दुर्गा पूजा एवं दशहरा उत्सव समिति कोसाबाड़ी के अध्यक्ष दुर्गेश पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि कोसाबाड़ी में हर साल काशी के सुप्रसिद्ध पुरोहितों द्वारा विधि-विधान से माता की पूजा-अर्चना कराई जाती है। इसके तहत प्रतिदिन नियमित रूप से सरस्वती पाठ का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि— “हमारा यह प्रांगण विशेष रूप से गरबा के लिए प्रसिद्ध है और यहाँ शहर का सबसे बड़ा गरबा होता है। इसमें हिस्सा लेने वाली सभी माताओं और बहनों की सुरक्षा के लिए समिति की ओर से पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं, और हर साल इसमें शामिल होने वाले प्रतिभागियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।”

🏛️ 1958 से चली आ रही परंपरा, बस्तर आर्ट और बांस शिल्प से सजा जेपी कॉलोनी का पंडाल

जेपी कॉलोनी दुर्गा उत्सव समिति के तरुण प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि बस्तर आर्ट यानी बांस शिल्प कला का उपयोग करके इस बार एक विशेष पंडाल बनाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने बताया कि यहाँ वर्ष 1958 से लगातार दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता आ रहा है, और यह कोरबा के सबसे पुराने पूजा स्थलों में से एक है। कोलकाता के कलाकारों ने बस्तर कला की तर्ज पर इस सुंदर पंडाल को तैयार किया है। उन्होंने कोरबा के समस्त नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में यहाँ पधारें और माँ दुर्गा के दर्शन कर इस भव्य उत्सव का आनंद लें।

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