Kanker News: जर्जर भवन के कारण ग्रामीण के घर में लग रही स्कूल; बाबूदबेना गांव के बच्चे शिक्षा से महरूम

छत्तीसगढ़

कांकेर: जिले के बाबूदबेना गांव में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। जिला मुख्यालय से महज 23 किमी दूर स्थित इस गांव का प्राथमिक स्कूल भवन इतना जर्जर हो चुका है कि पिछले एक सत्र से स्कूल का संचालन एक ग्रामीण के घर में किया जा रहा है। स्थिति यह है कि न केवल बच्चों की कक्षाएं, बल्कि शिक्षकों का कार्यालय और मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) भी उसी घर में संचालित हो रहा है।

🏠 ग्रामीणों ने दिखाई दरियादिली, प्रशासन सुस्त

शिक्षकों के अनुसार, पुराना भवन असुरक्षित होने के कारण बच्चों को पहले रंगमंच में बिठाया जाता था, लेकिन बरसात में वहां भी पढ़ाना मुश्किल हो गया। ऐसी स्थिति में गांव के एक व्यक्ति ने अपना खाली पक्का मकान बच्चों की पढ़ाई के लिए उपलब्ध कराया है। हालांकि, नए भवन की स्वीकृति मिल चुकी है और निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है, लेकिन ठेकेदार की सुस्त रफ्तार ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। वार्ड पंच देवचंद साहू ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्माण पूरा नहीं हुआ, तो बरसात में बच्चों को भारी परेशानी होगी।

📉 निर्माण में लेटलतीफी और घटती दर्ज संख्या

स्कूल भवन के निर्माण में हो रही देरी का असर सीधे बच्चों के नामांकन पर पड़ रहा है। शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा न होने से अभिभावक अपने बच्चों का टीसी (TC) कटवाकर उन्हें दूसरे स्कूलों में भेजने को मजबूर हैं। सुविधाओं के अभाव में सरकारी स्कूल की दर्ज संख्या में निरंतर गिरावट देखी जा रही है।

⚖️ प्रशासन का आश्वासन

इस मामले पर कांकेर जिला पंचायत सीईओ हरेश मंडावी ने कहा, “यदि कार्य आदेश जारी होने के बावजूद निर्माण कार्य में देरी हो रही है, तो ठेकेदार से जवाब तलब किया जाएगा। उन्हें जल्द से जल्द कार्य पूरा करने के लिए निर्देशित किया गया है ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।”

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