रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने देश की राजधानी दिल्ली में 24 मई को आयोजित होने वाले ‘आदिवासी समागम’ को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर बेहद तीखा राजनीतिक हमला बोला है। कांग्रेस ने इस पूरे आयोजन को एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया ‘राजनीतिक ढोंग’ करार दिया है। कांग्रेस नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि भाजपा और उसकी मातृ संस्था आदिवासी समाज के नाम पर इतने बड़े कार्यक्रम आयोजित कर सिर्फ आगामी चुनावों में वोटों का फायदा उठाना चाहती है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण आदिवासियों के मूल संवैधानिक अधिकारों को लगातार कमजोर किया जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने रांची स्थित मुख्य कांग्रेस भवन में आयोजित एक विशेष संवाददाता सम्मेलन (प्रेस कॉन्फ्रेंस) को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा बड़े-बड़े आयोजनों के जरिए आदिवासी समाज को गुमराह करने का असफल प्रयास कर रही है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर केंद्र और राज्यों की भाजपा सरकारें पूरी तरह खामोश बैठी हैं।
🌳 “वन अधिकार कानून को किया जा रहा है कमजोर”: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत ने विस्थापन और बेरोजगारी पर उठाए गंभीर सवाल
संवाददाता सम्मेलन में मौजूद कांग्रेस सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत ने देश के आदिवासी अंचलों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि झारखंड, छत्तीसगढ़ समेत देश के तमाम आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के पारंपरिक और कानूनी अधिकारों का खुलेआम हनन हो रहा है। केंद्र सरकार द्वारा कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए वन अधिकार कानून (Forest Rights Act) को लगातार शिथिल और कमजोर किया जा रहा है, जिससे जंगलों में विस्थापन की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
सुखदेव भगत ने कहा, “आज देश के आदिवासी युवाओं में बेरोजगारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ चुकी है, और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा व स्वास्थ्य की बुनियादी स्थिति बदहाल है। जो भी जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए आवाज उठाता है, उस पर दमनकारी प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है। ऐसे दमन चक्र के बीच दिल्ली में समागम आयोजित करना केवल एक राजनीतिक दिखावा और नौटंकी है।”
🏹 सरना धर्म कोड को वर्षों से लंबित रखने पर घेरा: सुखदेव भगत बोले— चुनावी लाभ के लिए सरना आस्था का अपमान कर रही भाजपा
सांसद सुखदेव भगत ने सीधे तौर पर केंद्र की मोदी सरकार पर आदिवासियों की सबसे बड़ी मांग यानी ‘सरना धर्म कोड’ (Sarna Dharma Code) को लेकर जानबूझकर गंभीरता न दिखाने का आरोप मढ़ा। उन्होंने देश को याद दिलाया कि झारखंड विधानसभा से पूर्ण बहुमत के साथ सरना धर्म कोड लागू करने का ऐतिहासिक और संवैधानिक प्रस्ताव पारित कर बहुत पहले ही केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है, लेकिन राजनीतिक द्वेष के कारण इसे वर्षों से दिल्ली की फाइलों में लंबित रखा गया है।
उन्होंने भावुक लहजे में कहा कि सरना धर्म केवल कोई राजनीतिक या धार्मिक पहचान मात्र नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, गौरव
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