रांची: डीजीपी नियुक्ति मामले में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा दिए गए आदेश के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड डीजीपी तदाशा मिश्रा को खुद इस्तीफा देने की सलाह दी है. बीजेपी प्रदेश कार्यालय में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि, “तदाशा मिश्रा को मैं जानता हूं. वो अन्य पुलिस पदाधिकारियों के अपेक्षा अच्छे पुलिस ऑफिसर हैं.” नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि तदाशा मिश्रा 31 जनवरी को रिटायर हो जाती हैं, लेकिन मुख्यमंत्री अवैध रूप से उन्हें फिर डीजीपी बनाते हैं.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जिस पुलिस अधिकारी का पूरा सर्विस बेदाग रहा हो, वैसे पुलिस पदाधिकारी को कोर्ट के आदेश हटना पड़े, ये अच्छा नहीं लगता है. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सोशल मीडिया में पोस्ट के माध्यम से उन्होंने सलाह दी है कि जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश आ गया है कि एक महीने के अंदर राज्य सरकार के द्वारा यूपीएससी को पैनल भेजकर डीजी की नियुक्ति करना है, ऐसे में सरकार हटाए, या उससे बेहतर है कि डीजीपी खुद हट जाएं.
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों डीजीपी नियुक्ति मामले में अहम फैसला सुनाते हुए सरकार को पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया का एक माह में पालन करने का निर्देश दिया है. सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि डीजीपी की नियुक्ति प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों और यूपीएससी की निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप ही की जानी चाहिए.
न्यायालय ने यह भी कहा है कि डीजीपी की नियुक्ति में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना अनिवार्य है. राज्य सरकार को इसके लिए पहले पात्र और वरिष्ठतम आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजनी होगी. यूपीएससी उस सूची में से तीन योग्य अधिकारियों का पैनल तैयार करेगा, इसके बाद राज्य सरकार को उनमें से एक को कम-से-कम दो वर्ष के निर्धारित कार्यकाल के लिए डीजीपी के पद पर नियुक्त करना होगा.
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