रांची: झारखंड में सीएनटी (CNT) एक्ट के कथित उल्लंघन और आदिवासी जमीन को चर्च व ईसाई संस्थाओं के नाम हस्तांतरित करने के मामले ने कानूनी तूल पकड़ लिया है। झारखंड हाईकोर्ट ने इस गंभीर विषय पर संज्ञान लेते हुए गुमला, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम और खूंटी के उपायुक्तों के साथ-साथ एससी-एसटी आयोग को नोटिस जारी किया है।
📜 सीएनटी एक्ट के उल्लंघन का आरोप
अधिवक्ता धीरज कुमार के अनुसार, विष्णु साहू द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि कानून के प्रावधानों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर आदिवासी जमीन का हस्तांतरण किया गया है। खंडपीठ ने इस मामले को केवल भूमि कानूनों का उल्लंघन नहीं, बल्कि राज्य की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकीय संरचना) पर पड़ने वाले संभावित असर के नजरिए से अत्यंत गंभीर माना है।
🔎 भूमि हस्तांतरण की वास्तविक स्थिति पर रिपोर्ट तलब
हाईकोर्ट ने संबंधित जिलों के उपायुक्तों को शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत यह जानना चाहती है कि इन क्षेत्रों में भूमि हस्तांतरण की वर्तमान स्थिति क्या है और क्या इसके कारण क्षेत्र का डेमोग्राफिक स्वरूप बदल रहा है। मामले की अगली सुनवाई अब दो सप्ताह बाद होगी।
🔄 सरना पहचान और राजनीतिक बहस
यह मुद्दा राज्य में सरना और गैर-सरना पहचान की राजनीतिक बहस के केंद्र में है। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन सहित कई प्रमुख हस्तियों ने सवाल उठाया है कि ओबीसी श्रेणी में वर्गीकृत समुदायों को आदिवासी जमीन का अधिकार कैसे हस्तांतरित किया जा रहा है। वहीं, आईआरएस अधिकारी निशा उरांव ने भी पेसा कानून और ग्राम सभा की पारंपरिक व्यवस्था की सुरक्षा पर बल देते हुए धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों की भूमिका पर स्पष्टता की मांग की है।
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