झाबुआ: मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के पिटोल चौकी क्षेत्र में एक संदिग्ध मौत का मामला सामने आया, जो असल में एक क्रूर हत्याकांड निकला। 25 मई को मोद नदी पुलिया के पास एक व्यक्ति का शव उसकी मोटरसाइकिल के साथ मिला था। मृतक के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे, जिससे पुलिस को शुरू से ही मामला दुर्घटना के बजाय हत्या का लग रहा था। गहन जांच के बाद पुलिस ने इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश करते हुए मृतक की पत्नी और पुत्र को गिरफ्तार कर लिया है।
🕵️ पुलिस की तकनीकी जांच से मिली सफलता
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी देवेन्द्र पाटीदार के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर मृतक की पहचान रामचंद उर्फ रामसिंह (39), निवासी ग्राम नागनखेड़ी के रूप में की। परिजनों और रिश्तेदारों से पूछताछ में पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले, जो सीधे मृतक की पत्नी सुमा और उसके बेटे की ओर इशारा कर रहे थे।
⚔️ क्या था ‘लाड़ी विवाद’ और हत्या का कारण?
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपित पत्नी और बेटा लंबे समय से मृतक से “लाड़ी विवाद” (पारिवारिक झगड़े) के निपटारे के नाम पर रुपयों की मांग कर रहे थे। जब मृतक ने रुपये देने से इनकार कर दिया, तो आक्रोशित होकर दोनों ने लट्ठ से उसकी बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई। अपराध को छिपाने के लिए आरोपितों ने रात के अंधेरे में शव और मोटरसाइकिल को मोद नदी पुल के किनारे फेंक दिया, ताकि पुलिस को लगे कि यह सड़क दुर्घटना है।
👮 पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका
पूछताछ के दौरान दोनों आरोपितों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त लट्ठ भी बरामद कर लिया है। इस जटिल मामले को सुलझाने में निरीक्षक आर.सी. भास्करे, उपनिरीक्षक अशोक बघेल, प्रधान आरक्षक दिलीप डावर, लक्ष्मी साल्वे और आरक्षक अनसिंह की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने एक और अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाकर अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है।
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