Jabalpur Crime: प्रॉपर्टी विवाद में पिता को बनाया बंदी, नशा मुक्ति केंद्र की आड़ में बेटे का खौफनाक खेल; जबलपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

मध्य प्रदेश

जबलपुर : सम्पति विवाद के कारण पिता को नशा मुक्ति केन्द्र में बंधक बनाकर रखे जाने का आरोप लगाते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गयी. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए वृद्ध को मेडिकल रिपोर्ट के साथ पेश किये जाने के आदेश जारी किये हैं. याचिका पर अगली सुनवाई 25 मार्च को निर्धारित की गयी है.

बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई

जबलपुर निवासी अक्षय चौधरी की तरफ से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में कहा गया है “वह दुर्गेश पटेल के पास काम करता है. सम्पति विवाद के कारण दुर्गेश पटेल को उनके पुत्र रूपेश पटेल ने जबरन नशा मुक्ति केंद्र में बंधक बनाकर रखा है.” हाई कोर्ट के आदेश पुलिस द्वारा पेश किये गये वृद्ध ने न्यायालय को बताया था “वह कोई साइकोट्रोपिक सब्सटेंस नहीं लेते. प्रॉपर्टी के झगड़े की वजह से उसे नशा मुक्ति केंद्र में रखा गया है.”

बेटे ने पिता पर जताया शक

कोर्ट में वृद्ध की पत्नी, बेटा और बेटी ने बताया “वह साइकोट्रोपिक सब्सटेंस लेते हैं. वह भू-माफिया के प्रभाव में हैं, जो प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा करना चाहते हैं.” युगलपीठ ने पुलिस जांच अधिकारी को वृद्ध की मेडिकल जांच नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के मेडिकल बोर्ड से करवाने के आदेश जारी किये. पिछली सुनवाई के दौरान वृद्ध की मेडिकल रिपोर्ट पेश करते हुए बताया गया था “वह गंभीर बीमार हैं और उसकी विस्तृत जांच आवश्यक है.”

सिफारिश पर वृद्ध को भर्ती करने के आदेश

रिपोर्ट में कहा गया “हॉस्पिटल में एक नशा मुक्ति मेडिकल ट्रीटमेंट फैसिलिटी सेंटर है, जो नई दिल्ली में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के साथ कोऑर्डिनेशन में चलाया जाता है. रिपोर्ट में सिफारिश की गई वृद्ध को उसी हॉस्पिटल में भर्ती कराया जाए.” युगलपीठ ने सभी पक्षों की सहमति के बाद मेडिकल बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार वृद्ध को सेंटर में भर्ती किये जाने के आदेश जारी किये.

बुजुर्ग बीमार हैं पर मानसिक रूप से स्वस्थ

याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया “वृद्ध मानसिक रूप से ठीक हैं परंतु कई बीमारियों से ग्रसित हैं.” वद्ध के पुत्र, पत्नी व बेटी की तरफ से बताया गया “पिता को नशे की लत है.” युगलपीठ ने सुनवाई के बाद आदेश जारी किये. याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेजा, अधिवक्ता विशाल बघेल ने पैरवी की.

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