इजराइल और लेबनान ने एक बार फिर सीजफायर लागू करने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही दोनों देशों ने लेबनान के अंदर कुछ ‘सिक्योरिटी जोन’ बनाने का फैसला किया है। इन इलाकों में हिज्बुल्लाह के लड़ाकों को रहने या गतिविधियां चलाने की अनुमति नहीं होगी। यह समझौता अमेरिका की मध्यस्थता में हुई चौथे दौर की बातचीत के बाद हुआ है। संयुक्त बयान में कहा गया कि सीजफायर तभी प्रभावी रहेगा जब हिज्बुल्लाह पूरी तरह से हमले बंद करेगा और लितानी नदी के दक्षिणी इलाके से अपने लड़ाकों को हटा लेगा। इन इलाकों का पूरा नियंत्रण लेबनानी सेना के हाथ में होगा, जो हिज्बुल्लाह की मौजूदगी को रोकेगी।
🇮🇷 इजराइल-लेबनान का ईरान को स्पष्ट संदेश
संयुक्त बयान में कहा गया कि ये कदम भविष्य में इजराइल और लेबनान के बीच स्थायी शांति की दिशा में मदद कर सकते हैं। दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि लेबनान का भविष्य सिर्फ उसकी सरकार और इजराइल की सरकार तय करेंगी; किसी बाहरी संगठन या देश को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से ईरान की ओर इशारा माना जा रहा है, जो हिज्बुल्लाह का प्रमुख समर्थक है। हालांकि, इस बातचीत में हिज्बुल्लाह शामिल नहीं था।
⚔️ सीजफायर के बावजूद हमले जारी, तनाव बरकरार
सीजफायर पर सहमति बनने के बावजूद हमले पूरी तरह नहीं रुके हैं। बुधवार को इजराइल के ड्रोन हमलों में दक्षिणी लेबनान में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई। लेबनान के सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, बेरूत के दक्षिण में एक कार को भी निशाना बनाया गया। दूसरी तरफ, इजराइल ने दावा किया कि उसने हिज्बुल्लाह द्वारा भेजे गए एक संदिग्ध हवाई लक्ष्य को नाकाम कर दिया। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने चेतावनी दी है कि यदि इजराइल बेरूत पर हमला करता है, तो ईरान इसका कड़ा जवाब देगा।
📞 नेतन्याहू-ट्रंप की बातचीत और युद्ध पर रुख
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि उन्होंने लड़ाई के दौरान इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन कर लेबनान में युद्ध रोकने की अपील की थी। नेतन्याहू ने कहा कि कुछ मुद्दों पर उनके और ट्रंप के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन ईरान को लेकर दोनों की सोच एक जैसी है।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad