ईरान में नए सुप्रीम लीडर को चुनने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है, लेकिन अभी तक उनके नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. यह फैसला देश की शक्तिशाली धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने लिया है. यह 88 सदस्यों की परिषद होती है, जो ईरान के सर्वोच्च नेता का चुनाव करती है. परिषद के सदस्य आयतुल्लाह मोहम्मदमेहदी मीरबाकेरी ने रविवार को कहा कि नए सुप्रीम लीडर के नाम पर ज्यादातर सदस्यों की सहमति बन चुकी है. हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि अंतिम घोषणा से पहले कुछ प्रक्रियाएं अभी बाकी हैं.
ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ये प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही नए नेता का नाम सार्वजनिक किया जाएगा. शनिवार को परिषद के एक सीनियर धर्मगुरु ने कहा था कि अगले सुप्रीम लीडर को चुनने के लिए सदस्य एक दिन के अंदर बैठक कर सकते हैं. लेकिन अब इस बात पर मतभेद सामने आए हैं कि फैसला किस तरीके से अंतिम रूप दिया जाए. कुछ सदस्य चाहते हैं कि सभी लोग आमने-सामने बैठकर औपचारिक बैठक में फैसला लें. वहीं कुछ सदस्य सुरक्षा कारणों से बिना बैठक के ही फैसला घोषित करने के पक्ष में हैं.
क्यों नहीं किया नाम का ऐलान?
परिषद के सदस्य अयातुल्ला मोहसिन हेदरी अलेकासिर ने कहा कि मौजूदा हालात में पूरी बैठक करना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि यह एक असाधारण स्थिति है और ऐसी बैठक करने से दुश्मनों को हमला करने का मौका मिल सकता है, जिससे ईरान की क्रांति को नुकसान होगा. दरअसल, 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध में कई ईरानी अधिकारी और सैन्य कमांडर मारे गए हैं. इन्हीं हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो गई थी.
इधर, इजराइल ने कहा है कि खामेनेई के हर संभावित उत्तराधिकारी को निशाना बनाया जाएगा. इजराइली डिफेंस फोर्स (IDF) ने कहा है कि उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया में शामिल हर शख्स को मार दिया जाएगा. ईरानी मीडिया के मुताबिक, हवाई हमलों में कोम शहर में असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स से जुड़ी एक इमारत भी नष्ट हो गई थी. परिषद के दो सदस्यों अयातुल्ला मोहसिन हेदरी अलेकासिर और अहमद अलमोल्होदा ने कहा है कि नया सुप्रीम लीडर पहले ही चुन लिया गया है. अब परिषद के चीफ सेक्रेटरी अयातुल्ला हाशेम होसैनी बुशेहरी इसकी आधिकारिक घोषणा करेंगे.
मोजतबा खामेनेई का नाम सबसे आगे
इस बीच मोजतबा खामेनेई का नाम भी सबसे आगे चल रहा है. 56 साल के मोजतबा खामेनेई, अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे हैं. वह कट्टरपंथी धर्मगुरु माने जाते हैं और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के साथ उनके करीबी संबंध बताए जाते हैं. उन्होंने कभी कोई बड़ा सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन लंबे समय से उन्हें अपने पिता का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता रहा है.
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