अंतरराष्ट्रीय कथावाचक साध्वी प्राची देवी सुनाएंगी भागवत कथा, धनगांव में रासलीला महोत्सव का आयोजन

छत्तीसगढ़

बलरामपुर : बलरामपुर के धनगांव में बीते 44 साल से बंगाली समुदाय रासलीला महोत्सव का आयोजन कर रहा है. इस बार यहां पांच दिवसीय कथा का आयोजन किया गया है. जिसमें प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कथावाचक साध्वी प्राची देवी कथा सुनाने के लिए पहुंची. साध्वी के आगमन पर बलरामपुर का वातावरण भक्तिमय हो गया.

भक्तों में खुशी का माहौल : बलरामपुर रामानुजगंज जिले के तातापानी के नजदीक बंगाली बाहुल्य धनगांव है. इस जगह 44 वर्षों से हर साल रासलीला महोत्सव का आयोजन हो रहा है. जिसमें स्थानीय बंगाली समुदाय के लोग रासलीला कथा सहित धार्मिक आयोजन करते हैं. इस बार प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कथावाचक साध्वी प्राची देवी यहां कथावाचन करने के लिए पहुंची हैं. जिससे क्षेत्र के भक्तों महिलाओं में काफी उत्साह का माहौल है.

पांच दिवसीय कथा में बताई जाएगी भगवान की लीला : धनगांव में पांच दिवसीय रासलीला महोत्सव में कथावाचन करने पहुंची साध्वी प्राची देवी ने ईटीवी भारत को बताया कि छत्तीसगढ़ के धनगांव में पिछले 44 वर्षों से रासलीला महोत्सव का बहुत सुंदर आयोजन किया जा रहा है. प्रतिवर्ष ये आयोजन होता है, लेकिन इस वर्ष पांच दिन की कथा होगी. जिसमें भगवान के लीला, गुणों एवं भक्तों की कथा को हम यहां श्रवण करेंगे. कथा का समय शाम सात बजे से रात्रि दस बजे तक है. अन्य दिनों में भी अखंड संकीर्तन और भंडारे का भी आयोजन यहां भक्तों ने किया है.

मेला और भंडारा प्रसाद का होगा वितरण : धनगांव में पांच दिवसीय रासलीला महोत्सव के दौरान मेला का आयोजन भी किया गया है. साथ ही यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए भंडारा प्रसाद की व्यवस्था भी समिति ने की है. इस आयोजन से पूरा क्षेत्र श्रद्धा एवं भक्ति के रस में सराबोर होने लगा है. पांच दिवसीय कथा के दौरान यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है.

कौन हैं प्राची देवी ? : प्राची देवी एक भारतीय कथावाचक और भजन गायिका हैं. जो भक्तों को श्रीमदभागवत गीता, रामचरितमानस, महाभारत, पद्म पुराण, गरुण पुराण और अग्नि पुराण जैसे शास्त्रों की लीलाओं के बारे में बताती हैं. प्राची देवी का जन्म और पालन-पोषण एमपी के जबलपुर में हुआ था. प्राची का परिवार आध्यात्मिक गतिविधियों में शुरु से ही जुड़ा था.पिता भगवद् गीता के उपदेशक हैं. इसलिए उनकी रुचि भी आध्यात्म की ओर हुई.

दादा से मिला ज्ञान : प्राची देवी को भागवत कथा का ज्ञान दादा पं. बाबूलाल शुक्ल से मिला. जब वो पांच साल की हुई तो उन्होंने पूरी भगवद् गीता का पाठ किया. वह अपने धाराप्रवाह पाठ से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं.प्राची देवी ने बारहवीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद, सिविल सर्विसेस की तैयारी करनी शुरु की. लेकिन पिता से मिले श्रीमद्भागवत गीता का ज्ञान लोगों तक प्रसारित करने के लिए सिविल परीक्षा की तैयारी करना छोड़ दिया. प्राची ने यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई अन्य देशों में भी धार्मिक ग्रंथों का प्रचार किया है.

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