चंडीगढ़: इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) ने हरियाणा और राजस्थान के बीच हाल ही में हुए जल समझौते को राज्य के अधिकारों का हनन करार दिया है। पार्टी मुख्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने साफ कहा कि इनेलो किसी भी कीमत पर हरियाणा के यमुना जल में हिस्सेदारी के साथ समझौता नहीं होने देगी।
⚖️ 1994 के समझौते पर सवाल और हरियाणा का घटता हिस्सा
प्रो. संपत सिंह ने 1994 के समझौते के इतिहास को विस्तार से समझाते हुए कहा कि उस समय केंद्र की पहल पर हरियाणा का जल हिस्सा लगभग 67 प्रतिशत से घटाकर 46 प्रतिशत कर दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की तर्ज पर अब बीजेपी सरकार भी उसी रास्ते पर चल रही है, जिससे राज्य के किसान और जल सुरक्षा खतरे में है।
🚧 लंबित परियोजनाएं और उपेक्षा का आरोप
इनेलो नेता ने चिंता जताई कि 1994 के समझौते में रेणुका, किशाऊ और लखवार-व्यासी बांधों के निर्माण का प्रावधान था, जो तीन दशक बाद भी पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान द्वारा प्राकृतिक जल प्रवाह को रोकने के बावजूद वर्तमान सरकार इन पुराने विवादों को सुलझाने के बजाय नए समझौते कर रही है, जो हरियाणा के हितों को और कमजोर करते हैं।
✊ इनेलो का संकल्प और भावी रणनीति
प्रो. संपत सिंह ने याद दिलाया कि अतीत में चौधरी ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व में इनेलो के 17 विधायकों ने हरियाणा के जल अधिकारों के लिए इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस को हरियाणा के हितों के प्रति विफल बताते हुए कहा कि इनेलो लोकतांत्रिक तरीके से लड़ाई जारी रखेगी। शीघ्र ही चौधरी अभय सिंह चौटाला के नेतृत्व में पार्टी की बैठक होगी, जिसमें आगामी रणनीति तय की जाएगी।
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