इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के बहुचर्चित और बेहद संवेदनशील ”हनीट्रैप-2026” कांड की कड़ियों को सुलझाने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा एक विशेष जांच दल (SIT) का विधिवत गठन कर दिया गया है। आदेश मिलते ही क्राइम ब्रांच की नवगठित एसआईटी ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में कड़ाई से पूछताछ और जांच शुरू कर दी है। इसी कड़ी में गुरुवार को पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए इंटेलिजेंस शाखा के प्रधान आरक्षक (Head Constable) विनोद शर्मा को भी आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए पुलिसकर्मी पर इस पूरे हनीट्रैप गिरोह की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल होने और आरोपियों की मदद करने का गंभीर आरोप है। फिलहाल, एसआईटी मुख्य आरोपी महिला रेशू के पास से जमीन की खरीदी-बिक्री से जुड़ा एक मुख्य अनुबंध पत्र (Agreement) जब्त करने का प्रयास कर रही है, जो इस रैकेट का एक बड़ा सबूत माना जा रहा है।
👩 दिल्ली की पढ़ाई से लेकर बड़े राजनेताओं से रसूख तक: जानिए कौन है हनीट्रैप की मुख्य आरोपी रेशू महेंद्र चौधरी
पुलिस उपायुक्त (DCP अपराध) राजेश त्रिपाठी से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मकरोनिया (सागर जिला) की मूल निवासी रेशू महेंद्र चौधरी से एसआईटी और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने बंद कमरे में लंबी पूछताछ की है। जांच में सामने आया है कि विदेश से उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुकी रेशू बेहद शातिर दिमाग है और वह सिविल सेवा व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी भाग ले चुकी है। दिल्ली में अपनी पढ़ाई के दौरान ही वह देश के कई बड़े और रसूखदार राजनेताओं के सीधे संपर्क में आ गई थी। दिल्ली से मिले इसी रसूख और राजनीतिक संपर्कों का फायदा उठाकर उसने मध्य प्रदेश के कई कद्दावर नेताओं और अफसरों से अपनी नजदीकी बढ़ाई। इसके बाद वह रसूखदारों को अपने जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये के जमीनों के अवैध धंधे और ब्लैकमेलिंग के इस काले कारोबार में पूरी तरह उतर गई। पुलिस अब इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य सफेदपोशों के नामों का पता लगा रही है।
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