उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक बुजुर्ग महिला को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) दिया जा रहा था. तभी अचानक उनकी पसलियां टूट गईं, क्योंकि उनके सीने पर चढ़कर सीपीआर दिया जा रहा था. बाद में महिला की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी. उन्हें आनन-फानन में हृदयरोग संस्थान के लिए रेफर कर दिया गया. मगर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. महिला के परिवार ने प्राइवेट नर्सिंग होम पर सीपीआर के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है.
जानकारी के मुताबिक, 59 साल की सुधा दुबे कन्नौज के गुरसहायगंज इलाके की रहने वाली थीं. सोमवार को अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई. परेशान परिजन उन्हें लेकर कानपुर के कल्याणपुर कैलाशविहार इलाके में स्थित एक प्राइवेट नर्सिंग होम पहुंचे. वहां उन्हें भर्ती करवा दिया गया. मंगलवार सुबह जब सुधा की तबीयत ज्यादा बिगड़ी और उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी, तो नर्सिंग होम में सीपीआर दिया गया. इसके बाद उनकी हालत और भी बिगड़ गई. उनकी सांसे लेने में परेशानी होने लगी.
परिवार में मचा कोहराम
ऐसे में नर्सिंग होम ने सुधा को हृदयरोग संस्थान के लिए रेफर कर दिया. यहां से एंबुलेंस के जरिए परिजन सुधा को लगभग पौने दो बजे कार्डियोलॉजी संस्थान लेकर पहुंचे, जहां डाक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. डॉक्टरों ने बताया कि उनकी पसलियां टूटी हुई हैं. ये बात सुनते ही परिवार के सदस्यों में कोहराम मच गया.
पहले ही करवाए हस्ताक्षर
मृतक सुधा दुबे की बेटी पूजा और बेटे सुरजीत ने आरोप लगाया है कि नर्सिंग होम के एक स्टाफ ने सीने पर चढ़कर सीपीआर दी थी. ऐसा करने से मां की पसलियां टूट गईं और उनकी मौत हो गई. उन्होंने बताया कि नर्सिंग होम वालों ने पहले ही कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए थे. इसके साथ ही बिना कुछ इलाज किए 21 हजार रुपये भी जमा कराए थे. मौत के बाद परिजन शव लेकर वापस कन्नौज लौट गए हैं. उनका कहना है कि इस मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से करेंगे.
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